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बुधवार, 16 जून 2010

राम दयाल जी का छंद:- ( प्रस्‍तुति - नवीन चतुर्वेदी)

श्री राम दयाल जी का छंद:- ( प्रस्‍तुति - नवीन चतुर्वेदी)

आंख नाहि लागै जा को जबर सों बैर परै,
आंख नाहि लागै - चित्त हरि सों लगात है|
आंख नाहि लागै जो कुलीन - धन हीन - रिनी,
आंख नाहि लागै जा के लगौ रोग गात है|
आंख नाहि लागै जा कें कन्या बिबाह जोग,
आंख नाहि लागै जो बियोग दुख पात है|
कहें 'रामदयाल' पल पलक न लागै यार,
आंख नाहि लागै जा की आंख लग जात है||

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