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बुधवार, 8 अप्रैल 2015

पहले अपनों के और अपनी कुल जाति के सगे व वफादार बनिये, तब दूसरों के सगे व वफादार बनने की बात कयिे

पहले अपने मॉं बाप के सगे बनो, वफादार बनो, फिर अपने परिवार के, फिर अपने कुटुम्ब के, फिर अपने कुल व जाति के , फिर अपने गॉंव के सगे और वफादार बनो, उसके बाद अपने क्षेत्र के , तब जाकर प्रदेश के सगे बनो वफादार बनो, उसके बाद देश के , तब फिर जाकर सारे विश्व के सगे और वफादार बनकर विश्व को अपाना कुटुम्ब कहो तब ''वसुधैव कुटुम्बकम'' कहलाता है , जो इन सबका गद्दार है , इनका सगा नहीं वह पूरे विश्व में किसी का भी सगा और वफादार नहीं हो सकता , कुल मिलाकर जो अपने मॉं बाप गुरू, घर परिवार गॉंव , जाति के प्रति वफादार और सगा नहीं वह निश्च‍ित ही दुनिया का सबसे बड़ा गद्दार और दगाबाज होता है , शास्त्र एवं भारत के संस्कार इसलिये जातिवाद को कभी बुरा नहीं मानते, आप अपनी जाति के प्रति वफादार हैं , इसका अर्थ यह नहीं कि आप अन्य किसी जाति के निन्दक या आलोचक हैं या उसे नीचा दिखाते हैं या उसके प्रति गद्दार हैं , गद्दारी और वफादारी, विश्वास व विश्वासघात केवल इन्हीं ऊपर लिखे लोगों के प्रति ही संभव है , पराये के प्रति नहीं - शुभ प्रभात मित्रवर .. जय श्री कृष्ण ... जय जय श्री राधे

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