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शनिवार, 30 मई 2015

केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की चम्बल यात्रा , जाते जाते भव्य व आलीशान राजनीति करने का जलजला बिखेर नया इतिहास रच गये , सिखा गये नेताओं को कि चंबल में राजनीति कैसे की जाती है

केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की चम्बल यात्रा , जाते जाते भव्य व आलीशान राजनीति करने का जलजला बिखेर नया इतिहास रच गये , सिखा गये नेताओं को कि चंबल में राजनीति कैसे की जाती है
• चम्बल में भव्य स्वागत के साथ सारे विधायक , सारे नेताओं सहित करीब तीन चार लाख लाग उमड़े नरेन्द्र सिंह तोमर के स्वागत में * मुरैना सांसद को नहीं खोज पाये केन्द्रीय मंत्री भी , लापता व गुमशुदा ही रहे मुरैना सांसद
• तोमरघार क्षेत्र में जाकर अहसास दिला गये नेताओं को , सरकार को, अनाथ मत समझ लेना तोमरघार को , मैं यहीं का बेटा हूँ, लहू का एक एक कतरा इसी भूमि पर गिरेगा मेरा
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’
ग्वालियर टाइम्स www.gwaliortimes.in

भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने एकदम अचानक चम्बल की धरती पर न केवल कदम धर दिया बल्कि् पूरी तरह से राजनीतिक व प्रशासनिक तौर पर अनाथ और अस्पृश्य एवं नजरअंदाज घोषि‍त कर दी गई तोमरघार बेल्ट में ही जाकर न केवल तमाम कार्यक्रम संपादित कर डाले , बल्किई यह भी कह गये कि , मैं इसी धरती का बेटा हूँ , कोई भूल से इसे अनाथ व नेतृत्व विहीन या अकेला समझने की भूल न करे , मेरे लहू का एक एक कतरा इसी तोमरघार की माटी से बना है , इसी पर गिरेगा ।
चम्बल की धरती पर किये गये जितने भी मेरे वायदे हैं या रूके हुये प्रोजेक्ट हैं या चम्बल के लोग जिस काम की भी कहेंगें या जिस काम को भी करवाना चाहेंगें , मैं बैठा हूँ , एक चिठ्ठी या एक खबर भी मुझे मिली , वही काम यहॉं हर हाल में अवश्य किया जायेगा और पूर्ण किया जायेगा ।
चम्बल की श्योपुर से लेकर ऐन पूरी तोमरघार गोरमी से मुरैना तक और भि‍ण्ड क्षेत्र की जनता के साथ सभी के सभी भाजपा विधायक और सारे भाजपा पदाधि‍कारीयों , नेताओं ने जहॉं पूरा मुरैना शहर और पूरी चम्बल नरेन्द्र सिंह तोमर के बैनरों और होडिंगों से पाट दी, तो पूरी चम्बल में ‘’नरेन्द्र सिंह तोमर जिंदाबाद’’ और देश का नेता कैसा हो ‘’ नरेन्द्र सिंह तोमर जैसा हो’’ के नारों से शहर मुरैना सहित जयकारों का गुजायमान कर दिया ।
जहॉं समूची भाजपा नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ एकजुट खड़ी नजर आई तो वहीं , केन्द्रीय मंत्री का पूरा ध्यान तोमरघार और मुरैना जिला पंचायत व मुरैना नगर निगम पर केन्द्रियत रहा ।
तोमर की चंबल यात्रा में हाशीये पर फेंकें गये लोग और विशेषकर राजपूत , गुर्जर, वैश्य, किरार सब के सब इकतारे के सुर में पहली दफा बरसों बाद एक सूत्र में बंधे नजर आये । क्या कहते हैं अखबार चम्बल के – लीजिये पढि़ये
विधायकों की जम कर तारीफ और – ग्वालियर मुरैना दोनों जगह के सांसद मुझे ही माने जनता और दोनों जगह के विकास की ली जिम्मेवारी
उपेक्षि‍त व नजरअंदाज एवं नाराज चल रहे लोगों ने दिखा दी जोश और ताकत , रच दिया एकता व भव्यता व आलीशानता का चम्बल की धरती पर इतिहास , पूरी चम्बल में मुरैना सांसद का न एक भी चित्र , न होडिंग , न बैनर , न नाम न पोस्टर, न विज्ञापन और न कहीं सूरत नजर आई । अलबत्ता मुरैना सांसद की बचे खुचे अस्तिरत्व को भी पूरी तरह समाप्त कर गये नरेन्द्र सिंह तोमर
उपेक्षित तोमरघार से लेकर ऐन श्योपुर तक गूंज गया आसमान , पूरे संसदीय क्षेत्र में केवल ‘’नरेन्द्र सिंह तोमर जिन्दाबाद’’ के सिवा कुछ सुनाई ही नहीं दिया , मंत्री के चित्रों होर्डिंगों बैनरों पोस्टरों से सज कर दुल्हन बनी चंबल बेशक नजारा ऐतिहासिक और आगाज बहुत जबरदस्त दमदार था


बुधवार, 20 मई 2015

मुरैना नगर निगम चुनावों की आहट में पेंचों खम के साथ , राजनीतिक गुण्ताड़े और जुगाड़बाजी शुरू 70 फीसदी दिग्गज नेता खुद ब खुद ही मैदान से बाहर , दिग्गज नेताओं की खानदानी शहरी सियासत के लिये रास्ते बंद , नये चेहरों के लिये खुले रास्ते



मुरैना नगर निगम चुनावों की आहट में पेंचों खम के साथ , राजनीतिक गुण्ताड़े और जुगाड़बाजी शुरू
70 फीसदी दिग्गज नेता खुद ब खुद ही मैदान से बाहर , दिग्गज नेताओं की खानदानी शहरी सियासत के लिये रास्ते बंद , नये चेहरों के लिये खुले रास्ते
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’
ग्वालियर टाइम्स   www.gwaliortimes.in   

मंगलवार, 19 मई 2015

प्रेस क्लब ने नगरपालिका मुरैना के प्रशासक सी.एम.ओ. के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई , मुख्यसचिव एवं प्रमुख सचिव को भेजा जायेगा पत्र

* नौकरी छोड़ दें रूपेश उपाध्याय , नगर निगम का या सांसद का चुनाव लड़ कर नेता बन जायें
* प्रेस क्लब ने नगरपालिका मुरैना के प्रशासक सी.एम.ओ. के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई , मुख्यसचिव एवं प्रमुख सचिव को भेजा जायेगा पत्र * कल पढि़ये ग्वालियर टाइम्स पर खास – मुरैना शहर के एक आधा भाग जो है शहर मुरैना में और नगरपालिका क्षेत्र में , मगर अछूत व अस्पृश्य तथा विकास से कोसों दूर , हालात गॉंवों से भी बदतर * परसों पढि़ये ग्वालियर टाइम्स पर – सांसद के कामकाज व कार्यप्रणाली से संघ व भाजपा नाखुश , मोदी चंबल की समस्याओं के प्रति बेहद गंभीर http://www.gwaliortimes.in

मंगलवार, 12 मई 2015

मुरैना अपराध डायरी - अथ श्री प्रेम कथा , एक प्रम कहानी रची गई पर लिखी , कही , सुनी नहीं गई , दास्तान ए लैला मजनूं

सच तो आखि‍र सच है, कब तक और कहॉं तक दबाया जायेगा, , और यूं ही खत्म नहीं हो गई हुकूमत और सल्तनत ए कांग्रेस
अटल ज्योति बनाम म.प्र. का कलंक , एक घोर व संगीन आपराधि‍क जुर्म, फर्जी योजना और उसमें हुये फर्जीवाड़े, मिथ्या घोषणा करने , मिथ्या व असत्य कृत्य अमूल्य व बहुमूल्य संपत्ति अर्जि‍त करने पर दर्ज हो सकती है शि‍वराज सिंह पर और भाजपा नेताओं सहित बिजली अधि‍कारीयो व अन्य सरकारी अफसरो पर एफ.आई.आर.
• अटल कटौती जो कि म.प्र. की जनता पर आफत का परकाला बन चुकी , पर कांग्रेस करती रही फर्जी नौटंकी व सतही दिखावा , वरना चाहती तो शि‍वराज सिंह चौहान सन 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ही अपनी प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी सहित जेल में होते 
• धरना प्रदर्शनों और आंदोलनों के बजाय सीधे मैदान में उतरकर कांग्रेस को दर्ज करानी थी एफ.आई.आर. , मगर नहीं कराई , संदेह के घेरे में कांग्रेस के नेता वरना सन 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले सन 2008 में ही म.प्र. में सरकार बदल जाती
मुरैना अपराध डायरी – प्रथम किश्त
• नरेन्द्र सिंह तोमर ‘आनन्द’’ , एडवोकेट Gwalior Times   Worldwide News & Broadcasting Services                          www.gwaliortimes.in

इसमें तो खैर कोई शक ही नहीं तथाकथि‍त ‘’अटल ज्योति’’ नामक योजना पूरी तरह से सार्वजनिक रूप से बोला कहा गया एक सरासर सफेद झूठ , मिथ्या अवलंबन, मिथ्या साक्ष्य रचना, कूटरचना , जालसाजी , जनता के साथ छल एवं धोखाधड़ी कर जनता की अमूल्य व बहुमूल्य संपत्ति ( वोट) को हासिल करना, ‘’अटल ज्योति नामक योजना के कूटरचित दस्तावेज ‘’ तैयार करना, एक दिखावटी कार्यक्रम आयोजन कर जनता को छल कपट पूर्वक आपराधि‍क षडयंत्र रच कर बरगलाना , फुसलाना और उससे प्राप्त वोट का उपयोग करना तथा उससे सत्ता हासिल कर सत्तानशीं हो जाना ।
भारतीय दण्ड विधान ( आई.पी.सी.) के तहत ये सब कृत्य घोर व गंभीर प्रकृति के संगीन व गैर जमानतीय अपराध हैं , और जहॉं इनमें जमानत बमुश्कि‍ल होगी तो वहीं इनकी सजा आजीवन कारावास से कम किसी हाल में नहीं है ।
ऐसे किसी भी कार्य में किसी भी प्रकम पर , चाहे वह ऐसी कूटरचित फर्जी योजना की घोषणा कराने, बनाने या उसे जालसाजी कर लागू करने के दिखावटी या कृत्रिम सम्मेलन या कार्यक्रम या किसी आयोजन में उपस्थि‍त किसी भी व्यक्तिे को जो इस पूरे प्रकम पर कहीं भी दखल या मौजूदगी रखता हो , आई.पी.सी. की धारा 34 या 120 बी के तहत स्वयं ही मुल्जिम बन जाता है
25 नवंबर 2013 को शाम से ही मतदान के बाद से ही म.प्र. में बिजली का वितरण, संवितरण प्रभावित हो गया था और अटल ज्योति नामक योजना का कूटरचित व फर्जी होना एवं प्रदेश की जनता के साथ एक बड़ी जालसाजी होने का एक साक्षात साक्ष्य व सबूत बन गया था ।
लेकिन उसके बाद जो म.प्र. में बिजली ने कहर ढाया वह कहर आज तक नहीं थमा , अब तो म.प्र. का आलम यह है कि अघोषि‍त बिजली कटौती के साथ साथ घोषि‍त बिजली कटौती भी भरी भीषण गर्मी में बदस्तूर जारी है गांया कुल मिलाकर घटित अपराध आज दिनांक तक और इस वक्त तक बदस्तूर जारी है ।
इस सम्बंध में बेहद व्यापक , रोचक व मजेदार तथ्य यह है कि , महज दो साल के या पौने दो साल के अल्पकार्यकाल में ही म.प्र. के मुख्यमंत्री शि‍वराज सिंह चौहान ने दो बार तथाकथि‍त सी.एम. हेल्प लाइन की घोषणा कर डाली , एक बार एक मोबाइल नंबर जारी किया गया , दूसरी बार 181 के नाम से पुरानी हेल्पलाइन को खत्म कर नई हेल्पलाइन शुरू की गयी । सी.एम. हेल्पलाइन 181 वैसे तो लगती ही नहीं , अगर बार बार प्रयास करते रहें और लग भी जाये तो करीब 70 फीसदी शि‍कायतों को दर्ज करने से इंकार कर दिया जाता है । यदि भूले भटके कोई शि‍कायत दर्ज भी कर ली गई तो अव्वल तो वह कभी निराकृत की ही नहीं जायेगी , हमारी सूचना के अनुसार करीब 90 फीसदी दर्ज शि‍कायतें आज दिनांक तक अनिराकृत हैं ।
अब जरा शि‍कायतों के निराकरण पर या फर्जी सरकारी जवाबों पर भी गौर फरमाया जाये तो आईये पहले वह अपराध आपको बताते हैं जो सरकारी क्षेत्र के कर्मचारी या अफसर या सरकारी क्षेत्र की बिजली कंपनी के लोग करते हैं , और किसी शि‍कायत के निराकरण में सरासर झूठ व फर्जी , मिथ्या असत्य उत्तर देते हैं । पहली बात यह कि किसी लोकसेवक द्वारा ( भले ही महज टेलीफोन से, ई मेल से या एस.एम.एस. या अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यम द्वारा केवल मौखि‍क सूचना ही प्राप्त हुई हो)  सूचना या इत्तला का दर्ज न किया जाना घोर व संज्ञेय प्रकृति का गैर जमानती अपराध है , इस सम्बन्ध में आई.पी.सी. सहित , सूचना का अधि‍कार अधि‍नियम 2005 , एवं भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सन 2008 में दिया गया स्पष्ट प्रावधान वर्णिीत एवं उपलब्ध है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि ‘’ सूचना या इत्तला या एफ.आई.आर. दर्ज करने में असफल व्यक्ति को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर , जेल में भेजा जाये ‘’ कुल मिलाकर आपको हर हाल में किसी भी सूचना या इत्तला या एफ.आई.आर. को दर्ज करना ही होता है , चाहे आप उससे पूरी तरह से असहमत हों, और स्वयं उसे असत्य मानते हों । 
आई.पी.सी. में किसी सूचना का लोकसेवक को ( पुलिस को या ऊपर से कार्यवाही कर रहे इस प्रक्रम की कार्यवाही कर रहे विभाग या अधि‍कारी को) न देना , सूचना या जानकारी का लोप करना, इत्तला छिपाना , अपराध हैं और पुलिस द्वारा ऐसे मामलों में एफ.आई.आर. दर्ज करना अनिवार्य है । इसी प्रकार किसी लोकसेवक द्वारा अपने कर्तव्य निर्वहन के दौरान गलत व भ्रामक इत्तला देना, असत्य सूचना देना, असत्य व मिथ्या जानकारी भेजना या देना , लोकसेवक का कर्तव्य निर्वहन करते हुये असत्य व अशुद्ध  लेखन या असत्य व अशुद्ध अंकन , असत्य कथन या बयान या घोषणा अपराध हैं व पुलिस द्वारा इस अपराध की भी एफ.आई.आर. दर्ज करनी अनिवार्य है । 
अपराध डायरी का यही अपराध जारी रहेगा मुरैना अपराध डायरी के अगले अंक में
इससे अगला अपराध–इसी डायरी में पढि़ये एक नादर्ज आपराधि‍क मामला, एक महाघोटाला और फर्जीवाड़ो का बाप महाफर्जीवाड़ा ......  और रातों रात शहर के बीचों बीच से गायब हो गई भारत सरकार की करोड़ों रूपये की इमारत, योजना और अमला सहित सैकड़ो महिलायें



रविवार, 3 मई 2015

मुरैना के भ्रष्टों के नाम एक खुला ऐलान ...... पढि़ये सुनिये जरा गौर से

ऐ भ्रष्ट और महा कुत्ते चाहे बिजली काट के रख , चाहे हजार उपाय कर , श्री कृष्ण को रोकने के कंस ने हजार उपाय किये , मगर फिर भी हुआ वही जो होना था , बंदीगृह के द्वारा खुले और पहरेदार सोये, तेरा बाप भी उतर आये तो भी हमारे वर्ल्डवाइड ब्राडकास्ट और वर्ल्डवाइड रिलीज नहीं रूक सकतीं , ले देख समूचे विश्व में प्रसारित हो चुकीं हैं , ये हमारा करारा झन्नाटेदार तमाचा तेरे मुँह पर .....  याद रखना राजपूत का एक हाथ सात स्वर्ग , सात पाताल सब नपा देता है ....   और हम नपा देंगें
मुरैना की पूरी रात और पूरे दिन चल रही बिजली कटौती के नाम और म.प्र. के मुख्यमंत्री की सी.एम. हैल्प लाइन के सौ फीसदी फेल हो जाने के उपलक्ष्य में आज यूनाइटेड नेशन्स द्वारा घोषि‍त  '' विश्व प्रेस आजादी दिवस '' के शुभ अवसर पर धुआंधार अंधाधुंध ''अटल ज्योति की अटल कटौती'' के नाम चम्बल प्रेस क्लब की ओर से विश्वस्तरीय ब्राडकास्ट व रिलीज ( हकीकत यह है और इसके पीछे कौन है , कुछ नाम बता दिये हैं , कुछ नाम आगे बतायेंगें, हालांकि मामला लोकायुक्त, आर्थ‍िक अपराध अन्वेषण ब्यूरो सहित , आपराधि‍क प्रकरण दर्ज कराने की दहलीज पर पहुँच चुका है ) इसके साथ ही इसमें कार्यवाही न करने / प्रकरण / एफ.आई.आर. दर्ज न करने की सूरत में सी.आर.पी.सी. सेक्शन 482 भी एक्सरसाइज करने की तैयारी की जा चुकी है , उल्लेखनीय है कि मुरैना जिला के पूर्व जिला शि‍क्षा अधि‍कारी हरीदास शर्मा के मामले में धारा 482 एक्सरसाइज की गई थी , जिसमें हरीदास शर्मा सहित करीब 80 लोगों के विरूद्ध एक ही एफ.आई.आर. में 46 अपराध दर्ज हुये थे । प्रकरण अपराध संख्या 663/02 दिनांक 20 सितम्बर 2002 है , इसके उपरांत इसी धारा की एक्सरसाइज मुरैना जिला में दर्ज हुये मुरैना कलेक्टर राधेश्याम जुलानिया द्वारा ( तत्कालीन ) दर्ज कराये गये फर्जी छात्रवृत्त‍ि के 42 मामलों में किया गया था , और हाईकोर्ट ने सारे मामले दोषगत व अवैध दर्ज पाकर सील करवा दिये थे । ग्वालियर टाइम्स मुरैना जिला में हुये बहुत बड़े बड़े और संगीन अपराधों , सरकारी गबनों और भ्रष्टाचार पर पर्दा उठाने के लिये एक नयी पर्दाफाश सीरीज शुरू करने जा रहा है ।
 इस सीरीज में आप मय सबूत जानेंगें और देखेंगें कि कवल अकेले मुरैना जिला में ही अरबों खरबों रूपये का सरकारी गबन भ्रष्टाचार और अंधेरगर्दी और फर्जीवाड़ा हुआ है  जिसमें चंबल कमिश्नर से लेकर प्रमुख सचिव तक स्तर तक के अधि‍कारी ही नहीं मुरैना के सांसद और विधायकों से लेकर अनेक मंत्री और नेता लिप्त हैं , इसमें बिजली विभाग सहित सिंचाई विभाग के भी बहुत तगड़े घोटाले और फर्जीवाड़े शामिल रहेंगें, यह सीरीज अगले हफ्ते से ग्वालियर टाइम्स पर शुरू होगी , अवश्य पढि़ये , फिलवक्त हमारे साथ मुरैना जिला की चल रही बदस्तूर बिजली कटौती का आनन्द लीजिये और यह गीत सुनिये  www.gwaliortimes.in    ;   http://www.facebook.com/TomarRajvansh/

शुक्रवार, 1 मई 2015

मन की बात .......... व्यंग्य - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

मन की बात .......... व्यंग्य - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
एक बार मोदी जी ने सोचा कि चलो भेष बदल कर देखा जाये के इस देश में क्या चल रहा है, सो भइया मोदी जी भोपाल रेल्वे प्लेटफार्म पर भेष बदलकर पहुंच गये , और बैठ गये एक जनरल बोगी में , टिकिट कटा लिया भोपाल से मुरैना का ...... मोदी जी को तलब लगी चाय की .... भोपाल रेल्वे स्टेशन पर एक स्टॉल पर पहुँचे ..... बोर्ड लगा था ... चाय - 150 ग्राम - 7 रूपये , कॉफी - 150 ग्राम - 7 रूपये ...... मोदी जी ने खुशी खुशी लपक के चाय की जगह 7 रूपये की कॉफी पी ली ...... अब गाड़ी स्टेशन से चली ..... विदिशा तक पहुँची .... सोचा के सुषमा स्वराज का उरिया है , यहॉं भी चाय पी ली जाये ..... चाय बेच रहे एक बाल्अी वाले से पूछा क्ये भइया चाय कितने की है, चाय वाला बोल 10 रूपये की ..... मोदी बोले के भोपाल में स्टेशन पर 7 रूपये में ज्यादा चाय मिल रही थी और तू तो ठग रहा है , जा तेरी चाय नहीं पीनी ..... चाय वाला बोला .... जैसी मिल रही है पी ले बे मरघट के बाराती, वरना आगे जा के मुझे और मेरी चाय को याद करेगा , पछतायेगा .... मोदी ने पर चाय नहीं पी , इसके बाद डेली अप डाउन वालों ने डिब्बे में घुसना शुरू किया और इत्मीनान से बैठे मोदी को पहले तो सरका सरका के कोने में घुसेड़ना शुरू करा और फिर दबा के शकल सूरत कद काठी सब सामान और सवारीयों के नीचे दब के लापता हो गये , ऊपर की बर्थ पे कोई औरत ने अपना छोटा बच्चा टिका दिया , डिब्बे में जगह नहीं सो जिसे जहॉं मिले उसी जगह टायलेट कार्यक्रम चल रहा था , गर्मी के दिन पजम्मा पेण्ट सब अपने आप ही सूखते जा रहे थे, मगर दिक्कत तब हो गई जब मोदी के ऊपर ही बच्चे ने ऊपर से ही टुल्ललललल से अपनी धार छोड़ना शुरू की , मोदी तर होने लगे और भरी गर्मी में थोड़ी बहुत ठंडक का अहसास होने लगा , मोदी ने कहा नसीब से .... मेरे नसीब से साला किसी की बिसलरी की बोतल का ढक्कन ठीक मेरे सिर के ऊपर ही खुला है , चलो ये ठीक हुआ, थोड़ी देर बाद बच्चे की छुल्लललल टुल्ललललल बंद हो गयी , मोदी ने कहा चलो मेरे नसीब से थेड़ी देर को सही , बिसलरी तो खुली ..... थोड़ी तो राहत मिली ..... नसीब से शायद आगे फिर ढक्कन खुलेगा ससुरी बिसलरी का ...... ऐसे ही ऐसे मोदी बबीना बीना तक आ पहुँचे ..... चाय वाल बाहर से चिल्लाया .... चये .... चये .... गरम ..... चये गरम ..... मोदी ने जैसे तैसे मुडी बाहर निकाली अबे चाय दे जा ... कितने की है .... चाय वाला बोला 5 रूपये की ..... मोदी ने लपक के चाय ले ली .... चाय देखी तो पता चला के बमुश्क‍िल 20 या 25 ग्राम चाय होगी ..... मोदी चिल्लाये तब तक गाड़ी छूट गई और ..... चाय वाला ये जा .... वो जा ..... मोदी बड़बड़ाते रहे ..... साला 5 रूपये में चाय पिला रहा है या चाय चखा रहा है , तब तक एक मुसाफिर बोला पी ले पीले ..... चाय चख रहा है इसे अपना नसीब समझ , 5 रूपये में चाय चखने को तो मिल रही है कम से कम .... चाय वाला पी.एम. है इस समय देश का ..... उसकी मर्जी .... चाहे चखाये .... चाहे पिलाये ...... हर चाय वाला इस समय पी.एम. है ..... अभी क्या देख रहा है ललितपुर पार करियो .... झांसी पहुँचेगा तो चाय का नसीब औकात दाम स्वाद चखना मखना सब भूल जायेगा ...... इसके बाद मोदी ने भी चुपके से पार करने की जगह कम देखते हुये और टायलेट तक पहुँचने का रास्ता न होने , टायलेट के अंदर ठसाठस भरी सामान की पोटलियां , बंडल , और सवारीयां देख , चुपके से अपने नीचे की पतलून भी तर कर ली और थोड़ी देर तक ठंडक महसूस करते हुये कहा नसीब से नीचे भी राहत मिली ..... अब इसके बाद तो मोदी ने डबरा , दतिया ग्वालियर , मुरैना कहीं चाय का भाव नहीं पूछा और न साले ऊपर वाले ने बिसलरी का ढक्कन ही फिर खोला ....... मुरैना उतर के मोदी बोले ...... ओह .... उफ्फ ..... खैर रही जिन्दा सही सलामत मुरैना तक आ गये ...... भइया अब जिन्दगी में ट्रेन से तो कहीं जाऊंगा नहीं ..... और जाऊंगा तो कही चाय नहीं पीऊंगा ..... चाय पीऊंगा तो सर्दी में तो कभी भूल के भी नहीं ..... वो तो भला हो गर्मी का मेरे नसीब से ..... के मुरैना उतरने से पहले पतलून सूख के जस की तस हो गई ..... टिचक्यूं

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