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शुक्रवार, 1 मई 2015

मन की बात .......... व्यंग्य - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

मन की बात .......... व्यंग्य - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
एक बार मोदी जी ने सोचा कि चलो भेष बदल कर देखा जाये के इस देश में क्या चल रहा है, सो भइया मोदी जी भोपाल रेल्वे प्लेटफार्म पर भेष बदलकर पहुंच गये , और बैठ गये एक जनरल बोगी में , टिकिट कटा लिया भोपाल से मुरैना का ...... मोदी जी को तलब लगी चाय की .... भोपाल रेल्वे स्टेशन पर एक स्टॉल पर पहुँचे ..... बोर्ड लगा था ... चाय - 150 ग्राम - 7 रूपये , कॉफी - 150 ग्राम - 7 रूपये ...... मोदी जी ने खुशी खुशी लपक के चाय की जगह 7 रूपये की कॉफी पी ली ...... अब गाड़ी स्टेशन से चली ..... विदिशा तक पहुँची .... सोचा के सुषमा स्वराज का उरिया है , यहॉं भी चाय पी ली जाये ..... चाय बेच रहे एक बाल्अी वाले से पूछा क्ये भइया चाय कितने की है, चाय वाला बोल 10 रूपये की ..... मोदी बोले के भोपाल में स्टेशन पर 7 रूपये में ज्यादा चाय मिल रही थी और तू तो ठग रहा है , जा तेरी चाय नहीं पीनी ..... चाय वाला बोला .... जैसी मिल रही है पी ले बे मरघट के बाराती, वरना आगे जा के मुझे और मेरी चाय को याद करेगा , पछतायेगा .... मोदी ने पर चाय नहीं पी , इसके बाद डेली अप डाउन वालों ने डिब्बे में घुसना शुरू किया और इत्मीनान से बैठे मोदी को पहले तो सरका सरका के कोने में घुसेड़ना शुरू करा और फिर दबा के शकल सूरत कद काठी सब सामान और सवारीयों के नीचे दब के लापता हो गये , ऊपर की बर्थ पे कोई औरत ने अपना छोटा बच्चा टिका दिया , डिब्बे में जगह नहीं सो जिसे जहॉं मिले उसी जगह टायलेट कार्यक्रम चल रहा था , गर्मी के दिन पजम्मा पेण्ट सब अपने आप ही सूखते जा रहे थे, मगर दिक्कत तब हो गई जब मोदी के ऊपर ही बच्चे ने ऊपर से ही टुल्ललललल से अपनी धार छोड़ना शुरू की , मोदी तर होने लगे और भरी गर्मी में थोड़ी बहुत ठंडक का अहसास होने लगा , मोदी ने कहा नसीब से .... मेरे नसीब से साला किसी की बिसलरी की बोतल का ढक्कन ठीक मेरे सिर के ऊपर ही खुला है , चलो ये ठीक हुआ, थोड़ी देर बाद बच्चे की छुल्लललल टुल्ललललल बंद हो गयी , मोदी ने कहा चलो मेरे नसीब से थेड़ी देर को सही , बिसलरी तो खुली ..... थोड़ी तो राहत मिली ..... नसीब से शायद आगे फिर ढक्कन खुलेगा ससुरी बिसलरी का ...... ऐसे ही ऐसे मोदी बबीना बीना तक आ पहुँचे ..... चाय वाल बाहर से चिल्लाया .... चये .... चये .... गरम ..... चये गरम ..... मोदी ने जैसे तैसे मुडी बाहर निकाली अबे चाय दे जा ... कितने की है .... चाय वाला बोला 5 रूपये की ..... मोदी ने लपक के चाय ले ली .... चाय देखी तो पता चला के बमुश्क‍िल 20 या 25 ग्राम चाय होगी ..... मोदी चिल्लाये तब तक गाड़ी छूट गई और ..... चाय वाला ये जा .... वो जा ..... मोदी बड़बड़ाते रहे ..... साला 5 रूपये में चाय पिला रहा है या चाय चखा रहा है , तब तक एक मुसाफिर बोला पी ले पीले ..... चाय चख रहा है इसे अपना नसीब समझ , 5 रूपये में चाय चखने को तो मिल रही है कम से कम .... चाय वाला पी.एम. है इस समय देश का ..... उसकी मर्जी .... चाहे चखाये .... चाहे पिलाये ...... हर चाय वाला इस समय पी.एम. है ..... अभी क्या देख रहा है ललितपुर पार करियो .... झांसी पहुँचेगा तो चाय का नसीब औकात दाम स्वाद चखना मखना सब भूल जायेगा ...... इसके बाद मोदी ने भी चुपके से पार करने की जगह कम देखते हुये और टायलेट तक पहुँचने का रास्ता न होने , टायलेट के अंदर ठसाठस भरी सामान की पोटलियां , बंडल , और सवारीयां देख , चुपके से अपने नीचे की पतलून भी तर कर ली और थोड़ी देर तक ठंडक महसूस करते हुये कहा नसीब से नीचे भी राहत मिली ..... अब इसके बाद तो मोदी ने डबरा , दतिया ग्वालियर , मुरैना कहीं चाय का भाव नहीं पूछा और न साले ऊपर वाले ने बिसलरी का ढक्कन ही फिर खोला ....... मुरैना उतर के मोदी बोले ...... ओह .... उफ्फ ..... खैर रही जिन्दा सही सलामत मुरैना तक आ गये ...... भइया अब जिन्दगी में ट्रेन से तो कहीं जाऊंगा नहीं ..... और जाऊंगा तो कही चाय नहीं पीऊंगा ..... चाय पीऊंगा तो सर्दी में तो कभी भूल के भी नहीं ..... वो तो भला हो गर्मी का मेरे नसीब से ..... के मुरैना उतरने से पहले पतलून सूख के जस की तस हो गई ..... टिचक्यूं

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