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मंगलवार, 25 अगस्त 2015

नदी तो साली कहीं है है ही नहीं , मगर मगरमच्छ चारा चुग रहे हैं करोड़ों का हर साल , किस्सा मुरैना की बिजली का

नदी तो साली कहीं है है ही नहीं , मगर मगरमच्छ चारा चुग रहे हैं करोड़ों का हर साल , किस्सा मुरैना की बिजली का
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
बिजली विभाग मुरैना ( मध्य क्षेत्र विद्य़ुत वितरण कंपनी) के आफिसर्स के विरूद्ध बड़ी पुलिस कार्यवाही ( आजीवन कारावास तक की सजा की ) करने की तैयारी , कलेक्टर मुरैना फर्जी बिलिंग और कूटरचित बिलिंग से नाराज , न खंबे न तार , फिर भी मुरैना के सारे गॉंवों के किसान बना दिये बिजली विभाग ने फर्जी बिल दे देकर डिफाल्टर
कलेक्टर मुरैना शिल्पा गुप्ता ने दिये सत्यापन और प्रमाणीकरण के आदेश , दिये और कहा अगर निकला मामला फर्जी बिलिंग का सही तो दर्ज होगी एफ. आई.आर.
बेशक कलेक्टर मुरैना शिल्पा गुप्ता चौपाल कार्यक्रम के तहत अब तक जहॉं जहॉं जिन जिन गॉंवों में गई हैं , हर गॉंव में यही आलम मिला है , न खंबे , न बिजली के तार , बरसों बरस से युग बीत गये गॉंव वालों ने बिजली कभी देखी नहीं , सुनी नहीं , मगर हर महीने बाकायदा हर गॉंव में हर किसान पर बिजली के बिल पहुँच रहे हैं , गोया आलम ये है कि मुरैना जिला विशेषकर कई चुनिन्दा क्षेत्र ऐसे हैं जहॉं , अत्याचार और जुल्म अपनी सारी सरहदें पार कर गया है ।
जहॉं बिजली है ही नहीं , या कभी पहुँची ही नहीं , वहॉं के लाखों किसान , बिजली विभाग के करोड़ों रूपये के अनबूझ डिफाल्टर हैं , मतलब साफ कि अपराधी हैं , मतलब साफ कि किसी प्रकार का कोई चुनाव नहीं लड़ सकते, मतलब ये कि सारे निर्दोष ही दोषी हैं , और दोषीयों की अदालत का हकुम औ फरमान ये कि सारे निदोष दोषी , अब वे न तो थाने में जमा आत्मरक्षार्थ अपनी बंदूकें वापस ले सकेंगें और न किसी बैंक से लोन , न खेती खाद के लिये कोई कर्ज या सहायता , न किसी योजना का लाभ ही उठा सकेंगें ।
आजीवन कारावास से दंडनीय है , फर्जी , कूटरचित , जाली और अशुद्ध बिल भेजना व डिफाल्टर कहना या डिक्लेयर करना
इंडियन पैनल कोड की यानि भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत , फर्जी बिलिंग, कूटरचित बिल बनाना, अशुद्ध बिल बनाना , अप्रमाणित बिलिंग करना या बनाना , जालसाजी कर किसी को अवमानित कर ब्लैकमेल करना , जबरन फर्जी वसूली कर डिफाल्टर होने से बचाने का आपराधिक षडयंत्र रचना , किसी से सम्पत्त‍ि प्राप्त करने या उगाहने या वसूलने के लिये डराना , धमकाना, फर्जीवाड़ा कर फर्जी व जाली दस्तावेज तैयार करना तथा इन सबमें प्रति व्यक्त‍ि व प्रति परिवार उसकी मानहानि स्वत: ही सयुक्त व सहबद्धित हो जाती है । लिहाजा आीवन कारावास से दंडनीय यह अपराध न केवल संज्ञेय अपराध हैं जिसमें पुलिस कभी भी बिना किसी वारंट के अरेस्ट कर सकती है , बल्कि गैर जमानतीय अपराध भी हैं ।
आई.पी.सी. की वे धारायें जिनके तहत बिजली आफिसर्स व बिलिंग कर्ताओं व फर्जीवाड़ा करने वालों के विरूद्ध दर्ज होगा अपराध -
धारायें - 167, 171 ग एवं च , 176, 177, 178, 181, 182, 193, 195, 196, 197, 198, 199, 200, 201, 202, 203, 204, 209, 210, 211, 213, 214, 383, 385, 389, 406, 409, 420, 445, 452, 453, 464, 465, 466, 467, 468, 469, 471, 472, 474, 476, 477, 477- क, 499, 500, 503, 506 आदि के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत व इलेक्ट्र‍िसिटी एक्ट ( भारतीय विद्युत अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया जा सकता है , कुल मिलाकर अब तलब पाये गये हजारों सबूतों के आधार पर आजीवन कारावास की सजा का केस दर्ज होना लगभग तय है , संभवत: व्यापम जैसा बहुत बड़ा तगड़ा घोटाला खुलना करीब करीब तय है ।
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द '' www.gwaliortimes.in/ www.facebook.com/Tomarrajvansh

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