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शनिवार, 31 दिसंबर 2016

मारण, असाध्‍य बीमारी, मूठ , चौकी , काला जादू की काट, पलट, खात्‍मा का प्र...





प्रत्‍यंगिरा मंत्र विधान एवं स्‍तोत्र का विश्‍वव्‍यापी प्रसारण
मारण, असाध्‍य बीमारी, मूठ , चौकी , नजर , काला जादू की काट, पलट, उलट, व खात्‍मा का प्रत्‍यंगिरा माला स्‍तोत्र ( शास्‍त्रीय मंत्र विधान )
आप यू ट्यूब पर इसे सीधे निम्‍न लिंक पर क्‍ल‍िक करके केवल 3 दिन के लिये नि:शुल्‍क देख एवं डाउनलोड कर सकते हैं , उसके पश्‍चात इस फिल्‍म को देखने , सुनने एवं डाउनलोड करने के लिये शुल्‍क भुगतान करना होगा ।
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रविवार, 25 दिसंबर 2016

क्रिसमस दिवस पर विशेष : एक विश मुहब्‍बत की - फिरदौस खान

क्रिसमस पर विशेष
संता से मांगी एक ’विश’ मुहब्बत की
-फ़िरदौस ख़ान
यह हमारे देश की सदियों पुरानी परंपरा रही है कि यहां सभी त्‍यौहारों को मिलजुल कर मनाया जाता है. हर त्यौहार का अपना ही उत्साह होता है- बिलकुल ईद और दिवाली की तरह.  क्रिसमस  ईसाइयों के सबसे महत्‍वपूर्ण त्‍यौहारों में से एक है. इसे ईसा मसीह के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाता है. क्रिसमस को बड़े दिन के रूप में भी मनाया जाता है. क्रिसमस से 12 दिन का उत्सव क्रिसमसटाइड शुरू होता है. ‘क्रिसमस’ शब्द ‘क्राइस्ट्स और मास’ दो शब्दों से मिलकर बना है, जो मध्य काल के अंग्रेज़ी शब्द ‘क्रिस्टेमसे’ और पुरानी अंग्रेज़ी शब्द ‘क्रिस्टेसमैसे’ से नक़ल किया गया है. 1038 ई. से इसे ‘क्रिसमस’ कहा जाने लगा. इसमें ‘क्रिस’ का अर्थ ईसा मसीह और ‘मस’ का अर्थ ईसाइयों का प्रार्थनामय समूह या ‘मास’ है. 16वीं शताब्दी के मध्य से ‘क्राइस्ट’ शब्द को रोमन अक्षर एक्स से दर्शाने की प्रथा चल पड़ी. इसलिए अब क्रिसमस को एक्समस भी कहा जाता है. भारत सहित दुनिया के ज़्यादातर देशों में क्रिसमस 25 दिसंबर को मनाया जाता है, लेकिन रूस, जार्जिया, मिस्त्र, अरमेनिया, युक्रेन और सर्बिया आदि देशों में 7 जनवरी को लोग क्रिसमस मनाते हैं, क्योंकि पारंपरिक जुलियन कैलंडर का 25 दिसंबर यानी क्रिसमस का दिन गेगोरियन कैलंडर और रोमन कैलंडर के मुताबिक़ 7 जनवरी को आता है. हालांकि पवित्र बाइबल में कहीं भी इसका ज़िक्र नहीं है कि क्रिसमस मनाने की परंपरा आख़िर कैसे, कब और कहां शुरू हुई. एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था. 25 दिसंबर यीशु मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है.शोधकर्ताओं का कहना है कि ईसा मसीह के जन्म की निश्चित तिथि के बारे में पता लगाना काफ़ी मुश्किल है. सबसे पहले रोम के बिशप लिबेरियुस ने ईसाई सदस्यों के साथ मिलकर 354 ई. में 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाया था. उसके बाद 432 ई. में मिस्त्र में पुराने जुलियन कैलंडर के मुताबिक़ 6 जनवरी को क्रिसमस मनाया गया था. उसके बाद धीरे-धीरे पूरी दुनिया में जहां भी ईसाइयों की तादाद ज़्यादा थी, यह त्योहार मनाया जाने लगा. छठी सदी के अंत तक इंग्लैंड में यह एक परंपरा का रूप ले चुका था. 

ग़ौरतलब है ईसा मसीह के जन्‍म के बारे में व्‍यापक रूप से स्‍वीकार्य ईसाई पौराणिक कथा के मुताबिक़ प्रभु ने मैरी नामक एक कुंवारी लड़की के पास गैब्रियल नामक देवदूत भेजा. गैब्रियल ने मैरी को बताया कि वह प्रभु के पुत्र को जन्‍म देगी और बच्‍चे का नाम जीसस रखा जाएगा. व‍ह बड़ा होकर राजा बनेगा, तथा उसके राज्‍य की कोई सीमाएं नहीं होंगी. देवदूत गैब्रियल, जोसफ़ के पास भी गया और उसे बताया कि मैरी एक बच्‍चे को जन्‍म देगी, और उसे सलाह दी कि वह मैरी की देखभाल करे व उसका परित्‍याग न करे. जिस रात को जीसस का जन्‍म हुआ, उस वक़्त लागू नियमों के मुताबिक़ अपने नाम पंजीकृत कराने के लिए मैरी और जोसफ बेथलेहेम जाने के लिए रास्‍ते में थे. उन्‍होंने एक अस्‍तबल में शरण ली, जहां मैरी ने आधी रात को जीसस को जन्‍म दिया और उसे एक नांद में लिटा दिया. इस प्रकार जीसस का जन्‍म हुआ. क्रिसमस समारोह आधी रात के बाद शुरू होता है. इसके बाद मनोरंजन किया जाता है. सुंदर रंगीन वस्‍त्र पहने बच्‍चे ड्रम्‍स, झांझ-मंजीरों के आर्केस्‍ट्रा के साथ हाथ में चमकीली छड़ियां  लिए हुए सामूहिक नृत्‍य करते हैं.  

क्रिसमस का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि ईसा मसीह के जन्म की कहानी का संता क्लॉज की कहानी के साथ कोई रिश्ता नहीं है. वैसे तो संता क्लॉज को याद करने का चलन चौथी सदी से शुरू हुआ था और वे संत निकोलस थे, जो तुर्किस्तान के मीरा नामक शहर के बिशप थे. उन्हें बच्चों से अत्यंत प्रेम था और वे ग़रीब, अनाथ और बेसहारा बच्चों को तोहफ़े दिया करते थे.
पुरानी कैथलिक परंपरा के मुताबिक़ क्रिसमस की रात को ईसाई बच्चे अपनी तमन्नाओं और ज़रूरतों को एक पत्र में लिखकर सोने से पूर्व अपने घर की खिड़कियों में रख देते थे. यह पत्र बालक ईसा मसीह के नाम लिखा जाता था. यह मान्यता थी कि फ़रिश्ते उनके पत्रों को बालक ईसा मसीह से पहुंचा देंगे. क्रिसमस ट्री की कहानी भी बहुत ही रोचक है. किवदंती है कि सर्दियों के महीने में एक लड़का जंगल में अकेला भटक रहा था. वह सर्दी से ठिठुर रहा था. वह ठंड से बचने के लिए आसरा तलाशने लगा. तभी उसकी नजर एक झोपड़ी पर पड़ी. वह झोपडी के पास गया और उसने दरवाजा खटखटाया. कुछ देर बाद एक लकड़हारे ने दरवाजा खोला. लड़के ने उस लकड़हारे से झोपड़ी के भीतर आने का अनुरोध किया. जब लकड़हारे ने ठंड में कांपते उस लड़के को देखा, तो उसे लड़के पर तरस आ गया और उसने उसे अपनी झोपड़ी में बुला लिया और उसे गर्म कपड़े भी दिए. उसके पास जो रूख-सूखा था, उसने लड़के को बभी खिलाया. इस अतिथि सत्कार से लड़का बहुत खुश हुआ. वास्तव में वह लड़का एक फ़रिश्ता था और लकड़हारे की परीक्षा लेने आया था. उसने लकड़हारे के घर के पास खड़े फ़र के पेड़ से एक तिनका निकाला और लकड़हारे को देकर कहा कि इसे ज़मीन में बो दो. लकड़हारे ने ठीक वैसा ही किया जैसा लड़के ने बताया था. लकडहारा और उसकी पत्नी इस पौधे की देखभाल अकरने लगे. एक साल बाद क्रिसमस के दिन उस पेड़ में फल लग गए. फलों को देखकर लकड़हारा और उसकी पत्नी हैरान रह गए, क्योंकि ये फल, साधारण फल नहीं थे बल्कि सोने और चांदी के थे. कहा जाता है कि इस पेड़ की याद में आज भी क्रिसमस ट्री सजाया जाता है. मगर मॉडर्न क्रिसमस ट्री शुरुआत जर्मनी में हुई. उस समय एडम और ईव के नाटक में स्टेज पर फर के पेड़ लगाए जाते थे. इस पर सेब लटके होते थे और स्टेज पर एक पिरामिड भी रखा जाता था. इस पिरामिड को हरे पत्तों और रंग-बिरंगी मोमबत्तियों से सजाया जाता था. पेड़ के ऊपर एक चमकता तारा लगाया जाता था. बाद में सोलहवीं शताब्दी में फर का पेड़ और पिरामिड एक हो गए और इसका नाम हो गया क्रिसमस ट्री अट्ठारहवीं सदी तक क्रिसमस ट्री बेहद लोकप्रिय हो चुका था. जर्मनी के राजकुमार अल्बर्ट की पत्नी महारानी विक्टोरिया के देश इंग्लैंड में भी धीरे-धीरे यह लोकप्रिय होने लगा. इंग्लैंड के लोगों ने क्रिसमस ट्री को रिबन से सजाकर और आकर्षक बना दिया. उन्नीसवीं शताब्दी तक क्रिसमस ट्री उत्तरी अमेरिका तक जा पहुंचा और वहां से यह पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया. क्रिसमस के मौक़े पर अन्य त्यौहारों की तरह अपने घर में तैयार की हुई मिठाइयां और व्यंजनों को आपस में बांटने व क्रिसमस के नाम से तोहफ़े देने की परंपरा भी काफ़ी पुरानी है. इसके अलावा बालक ईसा मसीह के जन्म की कहानी के आधार पर बेथलेहम शहर के एक गौशाले की चरनी में लेटे बालक ईसा मसीह और गाय-बैलों की मूर्तियों के साथ पहाड़ों के ऊपर फ़रिश्तों और चमकते तारों को सजा कर झांकियां बनाई जाती हैं, जो दो हज़ार साल पुरानी ईसा मसीह के जन्म की याद दिलाती हैं.

दिसंबर का महीना शुरू होते ही क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो जाती हैं . गिरजाघरों को सजाया जाता है. भारत में अन्य धर्मों के लोग भी क्रिसमस के उत्सव में शामिल होते हैं. क्रिसमस के दौरान प्रभु की प्रशंसा में लोग कैरोल गाते हैं. वे प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हुए घर-घर जाते हैं. भारत में विशेषकर गोवा में कुछ लोकप्रिय चर्च हैं, जहां क्रिसमस बहुत उत्‍साह के साथ मनाया जाता है. इनमें से ज़्यादातर चर्च भारत में ब्रि‍टिश वऔरपुर्तगाली शासन के दौरान बनाए गए थे. इनके अलावा देश के अन्य बड़े भारत के कुछ बड़े चर्चों मे सेंट जोसफ़ कैथेड्रिल, आंध्र प्रदेश का मेढक चर्च, सेंट कै‍थेड्रल, चर्च ऑफ़ सेंट फ्रांसिस ऑफ़ आसीसि और गोवा का बैसिलिका व बोर्न जीसस, सेंट जांस चर्च इन विल्‍डरनेस और हिमाचल में क्राइस्‍ट चर्च, सांता क्‍लाज बैसिलिका चर्च, और केरल का सेंट फ्रासिस चर्च, होली क्राइस्‍ट चर्च, महाराष्‍ट्र में माउन्‍ट मेरी चर्च, तमिलनाडु में क्राइस्‍ट द किंग चर्च व वेलान्‍कन्‍नी चर्च, और आल सेंट्स चर्च और उत्तर प्रदेश का कानपुर मेमोरियल चर्च शामिल हैं. बहरहाल, देश के सभी छोटे-बड़े चर्चों में रौनक़ है. 
तीज-त्यौहार ख़ुशियां लाते हैं. और जब बात क्रिसमस की हो, तो उम्मीदें और भी ज़्यादा बढ़ जाती हैं. माना जाता है कि क्रिसमस पर सांता क्लाज़ आते हैं और सबकी ’विश’ पूरी करते हैं. आज के दौर में जब नफ़रतें बढ़ रही हैं, तो ऐसे में मुहब्बत की विश की ज़रूरत है, ताकि हर तरफ़ बस मुहब्बत का उजियारा हो और नफ़रतों का अंधेरा हमेशा के लिए छंट जाए. हर इंसान ख़ुशहाल हो, सबका अपना घरबार हो, सबकी ज़िन्दगी में चैन-सुकून हो. (स्टार न्यूज़ एजेंसी)

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

बिस्‍म‍िल संग्रहालय मुरैना - चम्‍बल की एक बानगी

भारत के क्रान्‍त‍िकारी योद्धा , स्‍वतंत्रता संग्राम के महानायक पं. रामप्रसाद बिस्‍म‍िल की शहादत दिवस 19 दिसम्‍बर के अवसर पर विशेष फिल्‍म प्रस्‍तुति - बिस्‍म‍िल संग्रहालय - मुरैना ( म.प्र.)  चम्‍बल का भव्‍य  इतिहास , महाभारत व भारत , शांतनु, दुष्‍यन्‍त की जन्‍म स्‍थली , चम्‍बल भव्‍य व आलीशान इतिहास से लेकर आज तक के बदलाव व विकास , शेरों ( सिंहों ) की वीर प्रसूता जननी चम्‍बल तब से अब तक
स्‍वर व उच्‍चारण - नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''
कैमरा ( फोटो एवं फिल्‍म का वीडियो , मूवी शूट ) - असलम खान
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मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

भ‍िण्‍ड में जनसुनवाई में 155 आवेदनों का निराकरण किया गया

जनसंपर्क कार्यालय भ‍िण्‍ड द्वारा ग्‍वालियर टाइम्‍स के मार्फत सम्‍पूर्ण भारत वर्ष में ब्राडकास्‍टेड 

बुधवार, 27 जुलाई 2016

नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' को गूगल मैप्स इंकारपोरेशन ने गूगल मैप के लिये अपना लोकल गाइड बनाया

देवपुत्र पायवेट लिमिटेड ग्रुप ऑफ कम्पनीज के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं लीगल एडवाइजर, चम्बल की आवाज तथा ग्वालियर टाइम्स के सी. ई. ओ. नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' को गूगल मैप्स इंकारपोरेशन ने गूगल मैप के लिये अपना लोकल गाइड बनाया
नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' को गूगल ( इन्कार्पोरेशन ) कम्पनी ने स्थानीय गाइड नियुक्त किया , सभी स्थानीय फोटो , थ्री डी फोटो , वीडियो सहित , उसका नाम , इतिहास , और पृष्ठभूमि , विचार, सतर्कता , सावधानियां सहित सभी प्रकार के व्यू और रिव्यू लिखने के सर्वाध‍िकार कम्पनी ने तोमर को सौंपें
ग्वालियर / मुरैना 19 जुलाई 2016 । गूगल कम्पनी ने अपने बहुत बड़े व संपूर्ण विश्व तक फैले महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट '' गूगल मैप '' के लिय मुरैना के गांधी कालोनी के विख्यात व प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पुराने अति अनुभवी नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''' को अपना लोकल गाइड नियुक्त किया है ।
नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' को गूगल की ओर से नियुक्त‍ि पत्र प्राप्त हो गया है , साथ ही गूगल ने बहुत बड़ा काम करने जा रहे श्री तोमर को बहुत बड़ा अवार्ड देने की भी घोषणा की है ।
नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' अब न केवल किसी व्यक्त‍ि विशेष पर बल्क‍ि स्थल विशेष पर भी गूगल की ओर से काम करेंगें , किसी स्थल विशेष या व्यक्त‍ि विशेष को गूगल मैप में जोड़ सकेंगें, फर्जी या असत्य को हटा व डिलीट कर सकेंगें , लापता भवनों को तलाश सकेंगें, ऐतिहासिक स्थलों , किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान, व्यवसाय , होटल , खानपान, लॉजिंग , मंदिर , मस्जिद , चर्च , ढाबा अदि को चिह्न‍ित कर सकेंगें , उस पर ब्यौरा दजकर सकेंगें , उसे गेड दे सकंगें , डी ग्रेड कर सकेंगें ।
इसके अलावा किसी भी फोटो , वीडियो , थ्री डी वीड‍ियो या थ्री डी फोटो को गूगल मैप पर अपलोड कर सकेंगें , सभी ऐतिहासिक प्रृष्ठभूमि के स्थल अपलोड कर सकेंगें उनके इतिहास व ब्यौरे लिखें सकेंगें , स्थानीय स्कूलों , कालोजों के, चिकित्सा सुविधाओं, पेट्रोल पम्पों , सार्वजनिक सुविधाओं, होटलों आदि के नाम , चित्र वीडियो ब्यौरे ग्रेड , डीग्रेड , व्यू , रिव्यू लिख सकेंगें , जोड सकेंगें , हटा सकेंगें , किसी हस्ती विशेष , व्यक्त‍ि विशेष , युग पुरूष व ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर ब्यौरा चित्र वीडियो आदि जोड़ या हटा या बदल सकेंगें ।
असली सड़कों के , असली भवनों की व असल अधोसंरचना की , नगर के स्तरीय हालात व असल नगरीय हालात व स्थ‍िति के चित्र व वीडियो अपलोड कर सकेंगें , या हटा सकेंगें , संपादन व क्रियेशन , डिलीशन आदि सभी कार्य नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' गूगल मैप की ओर से तथा गूगल कम्पनी की ओर से करेंगें ।
नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द '' ने ग्वालियर चम्बल सहित राजस्थान के लोगों से कहा है कि वे अपने सड़को , बिजली संरचना , अन्य अधोसंरचना आदि के चित्र व वीडियो  आदि भेजते समय अपने कैमरे का जी.पी.एस. इन्फो ऑन रखें और , सारे जी.पी.एस. सूचनाओं की रिकार्डिंग कैमरे को ही करने दें , जिससे आपका फोटो या वीडियो स्वत: आटोमेटिक रूप से जियो टेग हो जायेगा और खुद ब खुद सही जगह गुगल मैप में स्वत: सेट हो जायेगा । अपने चित्र या वीडियो के साथ संपूर्ण ब्यौरा अवश्य भेंजें , उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभ्ज्ञूमि अवश्य भेजें , यदि किसी ऐतिहासिक स्थल से संबंधी वीडियो या चित्र भेज रहे हैं तो उसका संदर्भ ग्रंथ , प्रमाण‍िकता सहित संपूर्ण अतिहास व वंशावली आदि अवश्य भेजें ।
चम्बल के लोगों से बिजली , सडक व खेतों की हालत तथा अन्य इन्फ्रा स्ट्रक्चर संबधी वीडियो व चित्र भेजने की अपेक्षा की गयी है , जो गुगल के लोकल गाइड नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' द्वारा गुगल मैप में दर्ज किया गया जायेगा , केवल वही चित्र , वीडियो व ब्यौरा ही संपूर्ण विश्व में दिखेगा । 

महा काली कवच - फिल्म योगेश्वरी भाग -4


शनिवार, 25 जून 2016

योगेश्वरी ( भाग -3) फिल्म

फिल्म योगेश्वरी भाग - 3 में प्रस्तुत है , श्री दुर्गा सप्तशती का पिछली फिल्म योगेश्वरी भाग - 2 का शेष , महाभारत के मैदान में श्री कृष्ण के आदेश पर अर्जुन द्वारा की गयी देवी योगेश्वरी की स्तुति , सनातन धर्म के प्राचीनतम ग्रंथ श्री महाभारत में संपूर्ण विश्व के महाभारत सम्राट भारत जनमेजय सिंह तोमर ( सर्प सत्र या सर्प यज्ञ करने वाले ) को वैशम्पायन जी द्वारा सुनाया गया देवी ''योगेश्वरी ''  का स्तोत्र (वेदव्यास जी द्वारा रचित व पद्यबद्ध किया गया का स्तोत्र) प्रस्तुत है फिल्म येगेश्वरी भाग - 3 
Presented By Devputra Films and Media Pvt. Ltd. with collaboration of Gwalior Times and National Noble Youth Academy
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देवपुत्र फिल्म्स एण्ड मीडिया प्रायवेट लिमिटेड , ग्वालियर टाइम्स एवं नंशनल नोबल यूथ अकादमी के साथ , सहयोग व सौजन्य से प्रस्तुत करती है फिल्म योगेश्वरी भाग - 3
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रविवार, 12 जून 2016

स्त्री पुरूष सम्बन्ध व गुण मिलान , ऋणात्मक व धनात्मक ऊर्जायें एवं कुंडिल‍िनी का शक्त‍ि प्रवाह - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

स्त्री पुरूष सम्बन्ध व गुण मिलान , ऋणात्मक व धनात्मक ऊर्जायें एवं कुंडिल‍िनी का शक्त‍ि प्रवाह
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
मनुष्य मात्र में या प्राणी मात्र में जिनमें से उन्हें छोड़कर जो कि उभयलिंगी होते हैं जैसे केंचुआ, या अमीबा , पैरामीश‍ियम या अन्य , शेष बाकी सभी में मातृ शक्त‍ि और पितृ शक्त‍ि , तथा तीनों गुण सतो गुण , रजो गुण, तमो गुण मौजूद रहते हैं , प्रत्येक प्राणी मात्र में इन गुणों की यह मात्रा का अनुपात घटा या बढ़ा हुआ रहता है और यह भी कि यह सदैव घटता बढ़ता रहता है , जो हर मनुष्य के आचरण व व्यवहार का निर्धारण व नियंत्रण कर उसके व्यक्त‍ित्व व गुणों के साथ उसके प्रभा मंडल का निर्माण करता है , वैसे सभी प्राणी या सारे मनुष्य भौतिक देह आधार पर एक जैसे ही नजर आते हैं , लेकिन केवल इन गुणों के अनुपात घटते बढ़ने से उनके स्वभाव , आचरण, व्यवहार व कर्म निर्धारित होकर उनके स्वरूप व व्यक्त‍ित्व का निर्माण होता है ।
बेशक यही ध्रुव सत्य है कि जिस पुरूष में जिस अनुपात में पौरूषीय गुण शक्त‍ि तथा सत , रज या तम गुण की जितनी मात्रा होगी , उसके ठीक एकदम विपरीत कम या ज्यादा गुण शक्त‍ि वाली स्त्री स्वत: ही उसकी ओर आकर्ष‍ित व सम्मोहित होकर अनजाने ही उसकी चाहने वाली होगी , यह चाहना किसी भी रूप में या किसी भी हद तक हो सकता है । लोग इसे सभ्यतावश अनेक नाम दे देते हैं '' पसन्द'' करना से लेकर बहिन, पत्नी, मेहबूबा, प्रेमिका, या अन्य दीगर किसी प्रकार का अनजान या मित्रता मात्र का गहरा रिश्ता कुछ भी हो किन्तु उनमें स्वाभाविक परस्पर एक अंदरूनी प्रीति व लगाव एवं ख‍िंचाव बना रहेगा ।
मसलन उदाहरण के रूप में यह संभव है कि जिस पुरूष में पौरूषत्व ज्यादा हो , और इसके विपरीत किसी स्त्री में स्त्रीत्व ज्यादा हो तो उनमें स्वाभाविक ही सम्मोहन व आकर्षण हो जायेगा , इसी प्रकार स्त्रीत्व गुणों से संपन्न पुरूष के प्रति पुरूष गुण से संपन्न नारी के बीच स्वाभाविक सम्मोहन , आकर्षण व प्रीति होगी ।
अक्सर जहॉं समलिंगी सम्बन्ध या विवाह होते हैं , वहॉं इन्हीं गुणों व स्वरूपों का करिश्माई कमाल होता है , भगवान शंकर का अर्धनारीश्वर स्वरूप या श्री कृष्ण का या अर्जुन का स्त्रीवेश धारण करना इसे निरूपित व परिभाष‍ित कर इसकी विस्तृत व्याख्या करता है ।
एक नपुंसक लिंग या उभयलिंगी यदि कोई प्राणी शुरूआत में या जन्म से न हो लेकिन वह यदि कुंआरा रहने या ब्रह्मचर्य का व्रत धारण कर ले या समलिंगी सम्बन्ध कर ले या समलिंगीं विवाह कर ले तो , स्त्री पुरूष संबंधों से या तंत्र में भैरवी शक्त‍ि या भैरवी चक्र जागरण के बाद सहस्त्राधार तक कुंडिलिनी शक्त‍ि को ले जाकर '' ऊँ'' की प्राप्त‍ि का मार्ग पूरी तरह बदल जाता है और फिर ऐसे मनुष्य के अंदर स्वयं ही दोनों शक्त‍ियां यदि भैरव एवं भैरवी पैदा हो जायें तो ही वह साधना के अंतिम चक्र तक जाकर समाध‍ि अवस्था तक पहुँच पायेगा , अन्यथा विनष्ट होकर उसकी सारी शक्त‍ि ऋणात्मक होकर ऊर्ध्व गति प्रवाह के बजाय अधोगति प्रवाह में होने लगेगी और वह निम्नमनतर गति व ऋणात्मक होता जायेगा , आसुरी तत्व बढ़ते जायेंगें अंतत: अंतिम गति में उसका स्वरूप एवं अगली जन्म निम्न या क्षुद्र या किसी अन्य नीच योनि में होगा और उसे बेशक मनुष्य योनि में पुनर्जन्म लेना संभव नहीं होगा ।
स्त्री पुरूष चाहे वह दांपत्य जीवन में पति पत्नी हों , या प्रेमी प्रेमिका हों , मेहबूब व मेहबूबा हों या लिव इन रिलेशन में हों , उन्हें परस्पर ऊर्जायमान व तेजस्वी होने का अनुभव व अहसास यदि हो अर्थात सकारात्मक या धनात्मक ऊर्जा प्रवाह व समृद्धि , चेतना की परस्पर अनुभूति हो तो ही संबंध या रिश्ता जारी रखना चाहिये , अन्यथा इसके विपरीत यदि किसी भी प्रकार से पारस्परिक संबंधों से ऋणात्मकता या अधोगति या तनाव या चिन्ता या विकारग्रस्तता या खेद या ऋणत्मक ऊर्जा प्रवाह या समृद्धि व चेतना की हीनता या हृास या कमी अनुभव या महसूस हो तो , ऐसे रिश्ते या संबंध तुरंत समाप्त कर देने चाहिये और आगे और ज्यादा होने वाल अधोगति को जारी नहीं रखना चाहिये ।
जन्म कुण्डली मिलान में , वर व वधू की जन्म कुण्डली मिलान करना एक बहुत उत्तम व उचित व्यवस्था है , किन्तु यह पूरी तरह से एक गण‍ितीय व वैज्ञानिक विध‍ि व रीति है , कम ज्ञान वाले या अधूरे ज्ञान वाले या अगण‍ितीय या अवैज्ञाानिक ज्योतिषी से ऐसा जन्म कुण्डली विवाह मिलान नहीं कराना चाहिये । वरना सब कुछ उल्टा पुल्टा हो जायेगा ।
मसलन कुण्डी मिलान में कई गुणों का मिलान किया जाता है , जैसे वर्ण , योनि एवं नाड़ी आदि ..... इनके सबके अपने अपने अर्थ एवं महत्व हैं , कुल मिलाकर जितने गुण मिलान शास्त्रीय रीति से वर वधू के मिलान किये जाते हैं , एक उत्तम गण‍ितज्ञ व वैज्ञानिक ज्योतिषी उससे ज्यादा आगे जाकर अन्य और भी कई गुणों का मिलान कर एक सटीक व उत्तम विवाह मिलान कर सकता है या स्पष्टत: विवाह लिान को रिजेक्ट कर देगा । अत: देख भाल कर चालिये, यही में सबकी खैर , वरना चले थे मोहब्बत करने, पर हो गया उनसे वैर ..... ( विशेष कृपया उन लोगों से विशेष रूप से उनसे सवाधान रहें जो यह गारण्टी देते हैं कि प्रमिका का वशीकरण करा दूंगा , या आकर्षण करा दूंगा, खोया प्रेम पुन: वापस पायें , मनचाही संतान पायें वगैरह , आदमी की खुद की कोई गारण्टी नहीं होती कि आधे घण्टे के भीतर उसके खुद के साथ क्या होने वाला है , लिहाजा दूसरों को चैलेन्ज करके गारण्टी देने वाले खुद को खुदा कहने वाले या हनुमान जी का सिद्ध या किसी अवतार का सिद्ध बताने वाले ढोंगीं पाखण्डीयों से बच कर रहें , हो सकता है , कि आधे घण्टे में कुदरत या खुदा उन्हीं का कुछ और ही अंजाम लिख रही हो अत: अपना धन व समय एवं इज्जत बचा कर रखें , सोच समझ कर ही इसे खर्च करें ) हम नाम नहीं बताना चाहते , कुछ ज्योतषी व तंत्र के विशेषज्ञ हैं , ऐसे लोग भी हैं जो पूरे शहर भर में हमारे यहॉं सबकी जन्म कुण्डलियां बनाते हैं , कुण्डलियां मिलान करते हैं और पूजा पाठ हवन आदि तंत्र क्रियायें करते हैं , लेकिन खुद के लिये , अपने स्वयं के परिवार के लिये या किसी मोटे ग्राहक की कुंडली बनवाने या कुण्डली मिलान करवाने या किसी तंत्र क्रिया या हवन आदि , पूजा पाठ या अनुष्ठान के लिये वे हमारे पास आते हैं और हमसे यह सब करवाते हैं  , खैर यह उनका धंधा है , चलता भी खूब है , कमा भी खूब रहे हैं , चाहे कोई बर्बाद हो या आबाद हो , उन्हें बस अपने धंधे के चलने से काम .... खैर यह संसार है , इसी तरह चलता है   - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

रविवार, 22 मई 2016

Bharat - An Introduction भारत एक परिचय ( महाभारत और भारत)

भारत की एक असल खोज ( भारत का महाभारत) एक विश्व सल्तनत
कौन है भारत, किसका नाम है भारत , क्यों कहते हैं हमारे देश को भारत , भारत पिताजी का नाम है या हमारी माता जी का, क्या है वंदे मातरम् का असली अर्थ , क्यों नहीं बोलना चाहिये '' भारत माता की जय'' , कहॉं है दिव्य भारत , महाभारत क्या है , जानिये विश्व के सबसे प्राचीनतम किले और उसके असल निर्माताओं के बारे में पहली बार भारत का असल इतिहास , विश्व के सबसे प्राचीनतम सनातन धर्म के  ग्रंथ '' श्री महाभारत '' से , क्यों श्री कृष्ण ने श्रीमद भगवद्गीता में अर्जुन को बार बार '' भारत'' कहकर पुकारा और कहा कि '' यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत .... हे भारत ( अर्जुन) , जब जब धर्म की हानि होती है , क्यों अर्जुन के वंशजों को अर्थात तोमर राजवंश को भारत कहते हैं । जानिये सारे रहस्यों का खुलासा इस फिल्म में , जानिये कि स्वामी विवेकानंद ने क्या कहा है भारत के बारे में और अंग्रेजों के बारे में , सारे रहस्य खोलती एक फिल्म ''भारत'' ग्वालियर टाइम्स की दमदार, जानदार व शानदार प्रसारण प्रस्तुति , देवपुत्र फिल्म्स प्रायवेट लिमिटेड का निर्माण - स्वर व उच्चारण - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
यह फिल्म यू टयूब पर विश्व स्तर पर प्रकाशन एवं प्रसारण की जा चुकी है , आप इसे निम्न लिंक पर क्ल‍िक करके देख सकते हैं        https://youtu.be/Nl7hDmWoPXI
Presented By Gwalior Times
https://.gwaliortimes.wordpress.com
ग्वालियर टाइम्स प्रस्तुत करती है
https://gwalmadhya.blogspot.in

Bharat - An Introduction भारत एक परिचय ( महाभारत और भारत)

भारत की एक असल खोज ( भारत का महाभारत) एक विश्व सल्तनत
कौन है भारत, किसका नाम है भारत , क्यों कहते हैं हमारे देश को भारत , भारत पिताजी का नाम है या हमारी माता जी का, क्या है वंदे मातरम् का असली अर्थ , क्यों नहीं बोलना चाहिये '' भारत माता की जय'' , कहॉं है दिव्य भारत , महाभारत क्या है , जानिये विश्व के सबसे प्राचीनतम किले और उसके असल निर्माताओं के बारे में पहली बार भारत का असल इतिहास , विश्व के सबसे प्राचीनतम सनातन धर्म के  ग्रंथ '' श्री महाभारत '' से , क्यों श्री कृष्ण ने श्रीमद भगवद्गीता में अर्जुन को बार बार '' भारत'' कहकर पुकारा और कहा कि '' यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत .... हे भारत ( अर्जुन) , जब जब धर्म की हानि होती है , क्यों अर्जुन के वंशजों को अर्थात तोमर राजवंश को भारत कहते हैं । जानिये सारे रहस्यों का खुलासा इस फिल्म में , जानिये कि स्वामी विवेकानंद ने क्या कहा है भारत के बारे में और अंग्रेजों के बारे में , सारे रहस्य खोलती एक फिल्म ''भारत'' ग्वालियर टाइम्स की दमदार, जानदार व शानदार प्रसारण प्रस्तुति , देवपुत्र फिल्म्स प्रायवेट लिमिटेड का निर्माण - स्वर व उच्चारण - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
यह फिल्म यू टयूब पर विश्व स्तर पर प्रकाशन एवं प्रसारण की जा चुकी है , आप इसे निम्न लिंक पर क्ल‍िक करके देख सकते हैं        https://youtu.be/Nl7hDmWoPXI
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शुक्रवार, 20 मई 2016

Film - YOGESHWARI By GWALIOR TIMES  फिल्म - योगेश्वरी प्रस्तुति ग्वालियर...

फिल्म ''योगेश्वरी का पहला भाग , ग्वालियर टाइम्स ने विश्वस्तर पर रिलीज व टेलीकास्ट जारी किया
फिल्म का प्रॉडक्शन हाउस - देवपुत्र फिल्म्स प्रायवेट लिमिटेड
निम्न लिंक पर क्लिक करके यह फिल्म देखी जा सकती है

https://youtu.be/KaV2kLsFjws

Our You Tube Channe -
Check it for our Films as Links Given Below.
Our Full Channel -   https://www.youtube.com/channel/UCoQpkHHHw1d113G6y2FN_Jw
Our Play Lists -
Dharm / Aadhyatm - https://www.youtube.com/watch?v=GlAkkKaIr1c&list=PLFwqThLiNOIMWg4nOfESCYCxF6XokpDys
Gwalior Times Live - https://www.youtube.com/watch?v=nRsa5avKBac&list=PLFwqThLiNOIMey-gYy_ETXdNsvdIaSWHR
Gwalior Times Official Films - https://www.youtube.com/playlist?list=PLFwqThLiNOIOeaJJ4yA90ttyoODXk5m9r
Gwalior Times Films - https://www.youtube.com/playlist?list=PLFwqThLiNOINFTMJfBiF8KJJn-6DMEB61
Gwalior Times and Partners Films - https://www.youtube.com/playlist?list=PLFwqThLiNOIO3sycPV47HHOE40z5k7Hyl
फिल्म ''योगेश्वरी का पहला भाग , ग्वालियर टाइम्स ने विश्वस्तर पर रिलीज व टेलीकास्ट जारी किया
फिल्म का प्रॉडक्शन हाउस - देवपुत्र फिल्म्स प्रायवेट लिमिटेड
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Film - YOGESHWARI By GWALIOR TIMES  फिल्म - योगेश्वरी प्रस्तुति ग्वालियर...

फिल्म ''योगेश्वरी का पहला भाग , ग्वालियर टाइम्स ने विश्वस्तर पर रिलीज व टेलीकास्ट जारी किया
फिल्म का प्रॉडक्शन हाउस - देवपुत्र फिल्म्स प्रायवेट लिमिटेड
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मंगलवार, 10 मई 2016

Film - ''Yogeshwari'' by GWALIOR TIMES ग्वालियर टाइम्स

     ग्वालियर टाइम्स प्रस्तुत करती है पहली बार फिल्म '' योगेश्वरी''....  चन्द्रवंशीय तोमर राजवंश ( पांडव राजवंश ) की तीनों लोक , समस्त ब्रह्माण्ड की कुलदेवी पर पहली बार पूरी समग्र जानकारी और संपूर्ण इतिहास व सारी कथा ( भारत के सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों एवं शास्त्रों से तथा उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों से ) , तोमर राजवंश की कुलदेवी योगमाया , चिलाय माता भवानी , चील्हासन भवानी, भगेसुरी , हरसिद्धि ( कुंतलपुर ) , विध्यवासिनी , कौश‍िकी , ब्रह्मचारणी, कामाख्या आदि अनेक रूपों व नामों से विख्यात दरअसल मूल स्वरूप में दस महाविद्याओं में से एक मूल व प्रथम महाविद्या मॉं महाकाली हैं , जो पाताल में योगनिद्रा में लीन श्री हरि भगवान महाविष्णु की बहिन , उनकी आज्ञानुसार व इच्छानुसार कर्तव्य कर्म करने वाली भगवान श्री महादेव शंकर की असल व मूल पत्नी , इन्द्र एवं भगवान श्रीकृष्ण की बहिन , प्रत्येक प्राणीमात्र को तमाम रूप बदल बदल कर माया मोह में भ्रमित कर देने वाली , कंस के हाथों से छूटकर आकाश में बिजली बन कर उड़ जाने वाली, समस्त जगत को भ्रम व योग निद्रा , माया मोह निद्रा के आधीन कर मनचाहा खेल खेलने वाली , मॉं महाकाली , भगवान श्री शंकर महाकाल की अर्धांगिनी एवं पत्नी हैं , भगवान शंकर को संहार का देवता ( सृष्ट‍ि संहार का कार्य जब करना होता है ) की संज्ञा है , तब उनकी यानि अपने पति की इच्छा व कामना के अनुरूप श्री महाकाली यानि योगेश्वरी , यानि मामा भवानी योगमाया , योग निद्रा , चिलाय भवानी चील्हासन देवी , सृष्ट‍ि व प्रकृति के संहार व विनाश का कार्य करती हैं , संपूर्ण प्रकृति व सृष्ट‍ि को प्रलयरत कर नष्ट कर देतीं हैं और प्रलय काल में नृत्य करतीं हैं , सब कुछ नष्ट कर के , समस्त सृष्ट‍ि के संहार के पश्चात केवल मॉं योगनिद्रा , योगमाया , महाकाली ही मात्र शेष रहतीं हैं , वे अपने पति की इच्छा व आज्ञा एवं कामना का पालन इस तरह करती हैं कि समस्त खराब और बुरी , तामसी तत्वात्मक सृष्ट‍ि का प्रलय में लय हो जाता है और विनष्ट होकर सर्वनाश कर वे सभी बुरी व खराब प्रणीमात्र व प्रकृति की समस्त चीजों को पूर्णत: विलय कर समाप्त कर देतीं हैं , केवल मात्र सात्व‍िकी एवं अच्छे व साधु सज्जन व नेक प्राणी , तथा प्रकृति की केवल अच्छी व कल्याणकारी चीजें मात्र ही वे शेष छोड़तीं हैं , उसके पश्चात अपने भाई श्री हरि महाविष्णु से कहती हैं कि जाओ अब केवल सही सत्वगुण शेष है , उनके पालन पोषण का कार्य आप और महालक्ष्मी करिये .... बेहद रोचक .... 52 शक्त‍ि पीठों और दसों महाविद्याओं , नवों दुर्गाओं की मात्र अकेली स्वामिनी , अध‍िष्ठात्री  देेवी .... तोमर राजवंश की कुल देवी , पांडवों की कुल देवी , तीनों लोकों व समस्त ब्रह्माण्ड की पूज्या आराध्या देवी पर ग्वालियर टाइम्स की यह फिल्म प्रस्तुति कई भागों में है .... यह इस फिल्म का परिचयात्मक आडियो अर्थात केवल इंण्ट्रोडक्टरी आडियो रिलीज है , पूरी फिल्म देख कर ही आप तोमर राजवंश की कुलदेवी और देवी के असल कुछ दुर्लभ स्थान व उनके दृश्य एवं चित्र देख पायेंगें ... हमारा प्रयास रहेगा कि बीच में इस फिल्म के कुछ भागों को जीवंत करें , और बीच में कुछ फिल्मांकन दृश्य चित्रण करें, इसके लिये हम अच्छे फिल्म कलाकारों व फिल्म व सीरियल कार्य से जुड़े लोगों को तलाश रहे हैं .... मिल गये तो ठीक वरना जैसी फिल्म तैयार है , वैसी आपके सामने प्रस्तुत की जायेगी .... पूरी फिल्म व उसकी कहानी बेहद रोचक एवं और तोमर राजवंश की कुलदेवी के संपूर्ण व समग्र इतिहास को व आज तक की सूरत को ... आपके सामने लायेगी ... यह इण्ट्रोडक्ट्री आडियो है ... फिल्म आगे से भाग दर भाग यानि कई भागों में प्रसारित होगी  .... अत: हर भाग इस फिल्म का देखना न भूलें  .... ग्वालियर टाइम्स की प्रस्तुति ..... फिल्म - ''योगेश्वरी''  - आपका अपना नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
यू ट्यूब पर हमारा चैनल इस लिंक पर उपलब्ध है , यदि कोई भाग आपसे छूट जाये तो हमारे चैनल पर उस भाग को देख सकते हैं , https://www.youtube.com/channel/UCoQpkHHHw1d113G6y2FN_Jw 
Presented By Gwalior Times
http://gwlmadhya.blogspot.in/  ग्वालियर टाइम्स प्रस्तुत करती है http://gwlmadhya.blogspot.in/

गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

मुगल बाबर से पहली टक्कर लेने वाले जंगजू वीर राजपूतों और ग्वालियर सम्राट महाराजा विक्रमादित्य सिंह तोमर का शहादत दिवस आज

पानीपत के प्रथम युद्ध के वीरता पूर्वक लड़ते हुये युद्ध के मैदान में वीरगति पाकर मुगल बाबर से युद्ध करते हुये ग्वालियर सम्राट महाराजा विक्रमादित्य सिंह तोमर एवं 16 हजार राजपूत वीर योद्धाओं की शौर्य व पराक्रमशाली शहादत को गौरवपूर्ण सादर नमन व प्रणाम
तोमर राजवंश , तोमर राजपरिवार एवं समस्त तोमर राजपूत तथा भारत के समस्त क्षत्रिय व राजपूत
( क्षमा करें , हमें यह दुखद खेद है कि मुरैना में कल से पूरे दिन व आज लगातार बिजली कटौती के चलते , शहीदों की यह गौरवशाली व सादर नमन प्रणाम की पोस्ट डालने में , व्यापम व आरक्षण की औलादों , जातिवादीयों व महाभ्रष्टों गुलामों व वर्णसंकरों की हरकतों के कारण विलंब हुआ )  

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

अब फेसबुक के जरिये हर चीज व हर सेवा खरीदिये बेचिये , फेसबुक बना ई व्यापार और ऑनलाइन खरीदी बिक्री का सबसे बड़ा माध्यम

अब फेसबुक के जरिये हर चीज व हर सेवा खरीदिये बेचिये , फेसबुक बना ई व्यापार और ऑनलाइन खरीदी बिक्री का सबसे बड़ा माध्यम
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
व्हाटस एप्प द्वारा एण्ड टू एण्ड सिक्योरिटी देने के बाद , सारी सामग्री एनक्रिप्शन कर देने के बाद अब जहॉं खुद व्हाटस एपप कंपनी भी किसी के द्वारा किसी को या किसी ग्रुप के सदस्य न होते हुये उस साग्री को पढ़ नहीं सकती , वहीं अब पुलिस व साइबर सेल की पकड़ से भी व्हाटस एप्प बाहर निकल गया है , इसके साथ ही व्हाटस एप्प अकाउंट हैक करने वालों और दूसरे के मोबाइल नंबर से अकाउण्ट ऑपरेट करने वालों और हैकिंग की जद से भी व्हाटस एप्प बाहर निकल गया है । कंपनी द्वारा इसके लिये व्हाटस एप्प एप्लीकेशन के लिये अपडेटस विगत सप्ताह मंगलवार को जारी कर , मंगलवार से ही यह सुविधा लागू कर दी गयी थी ।
फेसबुक ने भी अपनी सिक्योरिटी बढ़ाते हुये , डाटा एन्क्र‍िप्शन के साथ ही ई व्यापार और ऑन लाइन खरीदी बिक्री की बहुत बड़ी अंतर्राष्ट्रीय सेवा शुरू की है , अब पूरे विश्व में कहीं से भी कुछ भी फेसबुक के जरिये खरीद और बेच सकते हैं ।
फेसबुक पर कुछ खरीदने बेचने के लिये , ई व्यापार या ऑनलाइन खरीदी बिक्री के लिये आपको फेसबुक की निम्न लिंकों पर जाकर , निम्न खरीदी बिक्री समूहों का सदस्य बनना होगा , इसके साथ ही आप अपने घर से बैठकर ही या अपने मोबाइल फोन के जरिये ही जो कुछ भी आपके पास बेचने के लिये या खरीदने के लिये हो , खरीद बेच सकते हैं , यहॉं तक कि पूरे विश्व में जहॉं भी जो कुछ सस्ता , अच्छा या दुर्लभ से दुर्लभ चीज या वस्तु या सेवा उपलब्ध करा सकते हैं या बेच सकते हैं या खरीद सकते हैं ।
फेसबुक के इन खरीद बिक्री समूहों के लिये निम्न में से किसी भी समूह को दोनों समूहों को ज्वाइन कर लें , इसके बाद आपके लिये फेसबुक पर खरीदने एवं बिक्री करने का  आप्शन खुद ब खुद खुल जायेगा , और पैसे सीधे आपके बैंक खाते में पहुँचने लगेंगें ।
http://www.facebook.com/groups/Gwaliorsale/
*
http://www.facebook.com/groups/evaapar/

Narendra Singh Tomar " Anand"

गुरुवार, 31 मार्च 2016

जब दिल में उल्फत हो , दूर दूर तक ना नफरत हो , तब होती है ऐसी यारी रिश्तेदारी

जब दिल में उल्फत हो , दूर दूर तक ना नफरत हो , तब होती है ऐसी यारी रिश्तेदारी
And Something Special for You. This Holi Special . The Super Popular Baaghi Sardar of Chambal Late. Madho Singh ( Madho Singh - Mohar Singh Giroh) Son, Mr. Sahdev Singh Bhadoriya Playing Holi with Me. ... A super Shot at my House. होली विशेष : चम्बल के मशहूर बागी सरदार स्व. माधौ सिंह ( माधौ सिंह - मोहर सिंह गिरोह) के बागी सरदार स्व. माधौ सिंह के सुपुत्र श्री सहदेव सिंह भदौरिया के साथ अबकी बार खेली गई हमारी होली का एक सुपर चित्र - यूं कि ये रंग रोगन सहदेव सिंह को हमीं ने पोता है .. जरा दिल से , जरा तबियत से - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' , मुरैना म.प्र.

सोमवार, 14 मार्च 2016

कन्हैया कुमार के विरूद्ध ग्वालियर न्यायालय में आपराधि‍क मामला पेश , परिवाद पर सुनवाई 21 मार्च को

कन्हैया कुमार के विरूद्ध ग्वालियर न्यायालय में आपराधि‍क मामला पेश , परिवाद पर सुनवाई 21 मार्च को
ग्वालियर , 14 मार्च 2016 , वाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय के कन्हैया कुमार के विरूद्ध एडवोकेट अवधेश सिंह भदौरिया की शि‍कायती क्रिमिनिल परिवाद पत्र पर , दिल्ली के कन्हैया कुमार के विरूद्ध भारतीय सेना के मामले में आपराधि‍क व राष्ट्राद्रोही टीका टिप्पणी , बयानादि को लेकर , ग्वालियर न्यायालय ने कन्हैया कुमार के विरूद्ध केस दर्ज किया है । इस क्रिमिनस केस की अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी ।
ज्ञातव्य है कि कन्हैया कुमार के विरूद्ध इंदौर न्यायालय में भी एक क्रिमिनल कंपलैण्ट परिवाद पत्र के रूप में एडवोकेट अमित सिंह सिसोदिया द्वारा प्रस्तु की गयी है , जो कि देश में और न्यायालय में अशांति फैलाने , भड़काऊ भाषण आकद देने तथा लोगों की आस्थाओं व निजी धार्मिक विश्वास पर हमला करने व चोट पहुँचाने को लेकर दायर किया गया है , एकाध दिन में यह मामला भी गैर जमानती संज्ञेय अपराध के रूप में रजिस्टर होने वाला है ।
सुनने में आ रहा है कि ऐसा ही कोई क्रिमिनल केस परिवाद पत्र कन्हैया कुमार व उसके समर्थकों के विरूद्ध चम्बल की एक अदालत में अन्य आपराधि‍क  कारणों पर प्रस्तुत किया जाने वाला है । या संभवत: सीधे ही पुलिस में एफ.आई. आर. दर्ज कराई जा सकती है ।
ऐसी सूरत में कन्हैया कुमार व उसके समर्थकों को देश भर की अलग अलग जेलों में डिटेन्शन में राजबन्दी के रूप में रखा जा सकता है , जहॉं हर जगह से उसे अलग जमानत लेनी अनिवार्य होगी । क्रिमिनल केसों की राजनीतिक सूरत ऐसी है कि यदि अन्य राज्यों में भी कुछ प्रकरण दर्ज हुये तो , कन्हैया कुमार व उसके साथि‍यों को जमानत लेने में पसीने छूट जायेंगें , कानूनन तब जमानत संभव नहीं होगी । कन्हैया का समर्थक की परिभाषा में प्रत्यक्षत: व अप्रत्यक्षत: या किसी सोशल मीडिया या व्हाटस एप्पादि के जरिये समर्थन देने व देशद्रोहात्मक या राष्ट्रविरोधी कन्हैया कुमार का किसी भांति समर्थन किया है ।

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