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गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

सामाजिक बदलाव के लिये ईमानदार और समर्पित कुशल नेतृत्व जरूरी

सामाजिक बदलाव के लिये ईमानदार और समर्पित कुशल नेतृत्व जरूरी


सामाजिक बदलाव में स्वैच्छिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका
इन्दौर | 15-फरवरी-2017
 
   
   जन अभियान परिषद इंदौर के तत्वावधान में आज प्रीतमलाल दुआ सभागृह में संवाद योजना के तहत स्वैच्छिक संगठनों का एक दिवसीय जिला स्तरीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री शमीम उद्दीन ने कहा कि भारत में अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा जनजागृति अभियान चलाया जाना चाहिये। सामाजिक, आर्थिक और स्वरोजगार के  क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अधिक सुधार की गुंजाइश है। जन अभियान परिषद इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है। जन अभियान परिषद की प्रस्फुटन समितियों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। कार्यक्रम को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती कीर्ति खुरासिया, श्री प्रदीप पाण्डे,जनअभियान परिषद इंदौर के संभाग समन्वयक श्री अमित शाह, समर्पित संस्था के श्री ऋषि मेहरा, जनअभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री नवनीत रत्नाकर और प्रस्फुटन तथा नवांकुर समितियों के प्रतिनिधियों ने सम्बोधित किया।
   इस अवसर पर कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये श्री अरूण जोशी ने सामाजिक विकास में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका विषय पर बोलते हुये कहा कि सामाजिक बदलाव में स्वयंसेवी संगठन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों का दायित्व है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार लायें। हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। उन्होंने कहा कि समाजसेवा एक नेक कार्य है और जनअभियान परिषद समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य समाज के लिये शुद्ध भोजन जरूरी है। दुर्भाग्य की बात यह है कि शहर में हवा, पानी और भोजन शुद्ध नहीं मिल रहा है,जिससे अनेक नयी बीमारियां पैदा हो रही हैं। शुद्ध हवा, पानी और भोजन के लिये हर व्यक्ति को जागरूक होना होगा।
   इस अवसर पर "नेतृत्व कौशल" विषय पर व्याख्यान देते हुये आचार्य शशिकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि समाज को आज एक कुशल और स्वार्थहीन नेतृत्व की जरूरत है। नेतृत्व कौशल के बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों का दायित्व है कि वे समाज को स्वार्थहीन नेतृत्व प्रदान करें। कुशल नेतृत्व के लिये ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण भाव जरूरी है। रामायण और महाभारत में अनेक ऐसे उदाहरण मिलेंगे कि जिनसे हम प्रेरणा लेकर समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि माँ समाज की प्रथम शिक्षिका है। स्त्री-पुरूष समान होते हैं। किसी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। सभी महान लोगों के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ रहा है। आधुनिक युग में मलाला युसुफजई और लालीबाई समाज का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सांचे में ढल जाते हैं ओर कुछ लोग सांचे को ही बदल देते हैं। इतिहास जिन लोगों को आज याद करता है या जिन्हें हम महापुरूष कहते हैं वे ऐसे ही व्यक्ति थे, जिन्होंने समाज के सांचे को बदल दिया। ठीक ही कहा गया है कि शायर, सिंह और सपूत लीक पर नहीं चलते। कुशल नेतृत्व से ही हम गांव की तकदीर और तस्वीर बदल सकते हैं। राज्य शासन की मंशा है कि जनअभियान परिषद की नवांकुर और प्रस्फुटन समितियां सामाजिक बदलाव की कर्णधार बनें। इसके लिये हमें अपने नजरिये में सुधार लाना होगा। हम पद, पैसा और प्रतिष्ठा का मोह छोड़कर हम सार्वजनिक हित का सर्वोपरि मानकर चलें। वह जवानी, जवानी नहीं है,जिसमें कोई आसाधारण उपलब्धि न हो। जिसके पास तरह-तरह के हुनर हैं,वहीं समाज का नेतृत्व कर सकता है। व्रत, उपवास, पूजा-पाठ से आत्मिक सुधार होता है। हमें राम बनना है, रावण नहीं। हमें राम के आदर्श, चरित्र से सबक सीखना चाहिये। ईश्वर ने हर व्यक्ति को अपने जैसा बनाया है। मनुष्य अच्छे कर्म करके इंसान से भगवान बन सकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों के सदस्य एवं पदाधिकारी मौजूद थे।

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