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गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

खेतों में नरवाई नहीं जलायें

खेतों में नरवाई नहीं जलायें


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भोपाल | 16-फरवरी-2017
 
   नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है साथ ही जन धन को नुकसान होने की संभावना बनी रहती है, पशुओं को प्राप्त होने वाला भूसा भी नष्ट हो जाता है कृषकों को कम्पोस्ट भी प्राप्त नहीं हो पाता है। नरवाई जलाने से मिट्टी में उत्पन्न होने वाले कार्वनिक पदार्थ में भी कमी आती है। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक हो गया है फसल कटाई उपरांत खेत में जो फसल अवशेष रह जाते हैं उनका प्रबंधन उनके तरीके से किया जाये।
   उप संचालक कृषि भोपाल ने किसानों से अपील की है कि जिन क्षेत्रों में हार्वेस्टर से कटाई की जाती है वहां स्ट्रा रीपर से भूसा बनाया जाये। कटाई हेतु रीपर कम बाइंडर का उपयोग किया जाये, जिससे फसल को काफी नीचे से काटा जा सकता है एवं नरवाई जलाने की आवश्यकता नहीं होती है। खेतों में गहरी जुताई, रोटावेटर, हेप्पीसीडर तथा जीरो टिलेज सीडड्रिल से बुआई करना चाहिए जिससे फसल अवशेष मिट्टी में मिलकर भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी।

श्रेष्ठ फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन

श्रेष्ठ फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन


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भोपाल | 16-फरवरी-2017
 
   मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड भोपाल के निर्देशानुसार जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से व्यक्तियों एवं आम नागरिकों की भागीदारी एवं कार्यों को अन्य के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनाने के उद्देश्य से प्रदेश स्तर पर श्रेष्ठ फोटोग्राफी प्रतियोगिता 2017 का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता की प्रथम पुरस्कार राशि 25 हजार, द्वितीय पुरस्कार राशि 20 हजार एवं तृतीय पुरस्कार राशि 15 हजार रूपए है।
   प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु प्रतिभागी द्वारा प्रविष्टियां प्रत्यक्ष, डाक या ऑनलाइन www.mpsbb.nic.in पर भेजी जा सकती है। समस्त माध्यमों से 28 फरवरी को सायं 4 बजे तक प्रविष्टियां प्रेषित की जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट अथवा कार्यालयीन समय में संबंधित कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। लिफाफे पर श्रेष्ठ फोटोग्राफी प्रतियोगिता 2017 अंकित करना अनिवार्य है।

नियमित से स्वाध्यायी किए गए परीक्षार्थियों की सूची ऑनलाइन भेजी जाये

नियमित से स्वाध्यायी किए गए परीक्षार्थियों की सूची ऑनलाइन भेजी जाये


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भोपाल | 16-फरवरी-2017
 
   माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल परीक्षा 2017 में नियमित से स्वाध्यायी किए गए परीक्षार्थियों की सूची ऑनलाइन माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल को 25 फरवरी तक अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा नियंत्रक द्वारा निर्देशित किया गया है कि ऐसे नियमित छात्रों के संबंध में जिन्हें नियमित परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं रह गई है, स्वाध्यायी छात्र के रूप में परीक्षा में शामिल होने के लिए जारी प्रवेश प्रक्रिया अनुसार अतिरिक्त शुल्क 20 रूपये प्रति छात्र अदा करने पर स्वाध्यायी छात्र के रूप में परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे।
   नियमित से स्वाध्यायी किए जा रहे परीक्षार्थियों की सूची केवल ऑनलाइन स्वीकार की जायेगी। ऐसी सूचियां ऑनलाइन प्रेषित करने के लिए एम.पी. ऑनलाइन के निकटस्थ कियोस्क पर परीक्षा आवेदन के एप्लीकेशन क्रमांक के आधार पर 25 फरवरी तक जमा की जा सकेगी। जिन संस्थाओं द्वारा पूर्व में ऑनलाइन सूची शिक्षा मंडल को प्रेषित की गई है, वे संस्थायें भी सूची ऑनलाइन प्रेषित की जाना सुनिश्चित करें।

पीएससी द्वारा होगी खेलकूद अधिकारियों की भर्ती

पीएससी द्वारा होगी खेलकूद अधिकारियों की भर्ती


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इन्दौर | 15-फरवरी-2017
 
   मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर द्वारा खेलकूद अधिकारियों की भर्ती की जायेगी, जिसके लिये विज्ञापन जारी कर दिया गया है और ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 12 मार्च, 2017 है। लोक सेवा आयोग द्वारा मध्यप्रदेश खेल एवं युवक कल्याण सेवा के राजपत्रित 25 पदों के लिये भर्ती की जा रही है। इनके पदनाम जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, खेल अधिकारी, सहायक संचालक, युवक कल्याण अधिकारी होंगे। इनका वेतनमान 9300-34800अ4200 ग्रेड-पे में द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी पद पर भर्ती की जायेगी। मध्यप्रदेश के निवासियों के लिये आयु सीमा अधिकतम 21 से 40 वर्ष मध्यप्रदेश के बाहर के अभ्यर्थियों के अधिक अधिकतम आयु सीमा 21 से 35 वर्ष निर्धारित की गयी है। पद के लिये न्यूनतम शैक्षणिक आर्हता स्नातक के साथ एमपी एङ या एम.पी.ई. और राष्ट्रीय खेल अथवा अधिकृत सीनियर राष्ट्रीय चैम्पियनशील में प्रतिनिधित्व होना चाहिये। लिखित परीक्षा 30 अप्रैल, 2017 को प्रात: 10 बजे से 12 बजे तक और दोपहर तीन बजे से पांच बजे तक ऑनलाइन आयोजित की जायेगी। विस्तृत जानकारी आयोग की वेबसाइट www.pscdemo.in, www.mppsc.nic.in  तथा www. mppsc.com पर देखी जा सकती है।

सामाजिक बदलाव के लिये ईमानदार और समर्पित कुशल नेतृत्व जरूरी

सामाजिक बदलाव के लिये ईमानदार और समर्पित कुशल नेतृत्व जरूरी


सामाजिक बदलाव में स्वैच्छिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका
इन्दौर | 15-फरवरी-2017
 
   
   जन अभियान परिषद इंदौर के तत्वावधान में आज प्रीतमलाल दुआ सभागृह में संवाद योजना के तहत स्वैच्छिक संगठनों का एक दिवसीय जिला स्तरीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री शमीम उद्दीन ने कहा कि भारत में अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा जनजागृति अभियान चलाया जाना चाहिये। सामाजिक, आर्थिक और स्वरोजगार के  क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अधिक सुधार की गुंजाइश है। जन अभियान परिषद इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है। जन अभियान परिषद की प्रस्फुटन समितियों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। कार्यक्रम को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती कीर्ति खुरासिया, श्री प्रदीप पाण्डे,जनअभियान परिषद इंदौर के संभाग समन्वयक श्री अमित शाह, समर्पित संस्था के श्री ऋषि मेहरा, जनअभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री नवनीत रत्नाकर और प्रस्फुटन तथा नवांकुर समितियों के प्रतिनिधियों ने सम्बोधित किया।
   इस अवसर पर कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये श्री अरूण जोशी ने सामाजिक विकास में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका विषय पर बोलते हुये कहा कि सामाजिक बदलाव में स्वयंसेवी संगठन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों का दायित्व है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार लायें। हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। उन्होंने कहा कि समाजसेवा एक नेक कार्य है और जनअभियान परिषद समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य समाज के लिये शुद्ध भोजन जरूरी है। दुर्भाग्य की बात यह है कि शहर में हवा, पानी और भोजन शुद्ध नहीं मिल रहा है,जिससे अनेक नयी बीमारियां पैदा हो रही हैं। शुद्ध हवा, पानी और भोजन के लिये हर व्यक्ति को जागरूक होना होगा।
   इस अवसर पर "नेतृत्व कौशल" विषय पर व्याख्यान देते हुये आचार्य शशिकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि समाज को आज एक कुशल और स्वार्थहीन नेतृत्व की जरूरत है। नेतृत्व कौशल के बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों का दायित्व है कि वे समाज को स्वार्थहीन नेतृत्व प्रदान करें। कुशल नेतृत्व के लिये ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण भाव जरूरी है। रामायण और महाभारत में अनेक ऐसे उदाहरण मिलेंगे कि जिनसे हम प्रेरणा लेकर समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि माँ समाज की प्रथम शिक्षिका है। स्त्री-पुरूष समान होते हैं। किसी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। सभी महान लोगों के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ रहा है। आधुनिक युग में मलाला युसुफजई और लालीबाई समाज का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सांचे में ढल जाते हैं ओर कुछ लोग सांचे को ही बदल देते हैं। इतिहास जिन लोगों को आज याद करता है या जिन्हें हम महापुरूष कहते हैं वे ऐसे ही व्यक्ति थे, जिन्होंने समाज के सांचे को बदल दिया। ठीक ही कहा गया है कि शायर, सिंह और सपूत लीक पर नहीं चलते। कुशल नेतृत्व से ही हम गांव की तकदीर और तस्वीर बदल सकते हैं। राज्य शासन की मंशा है कि जनअभियान परिषद की नवांकुर और प्रस्फुटन समितियां सामाजिक बदलाव की कर्णधार बनें। इसके लिये हमें अपने नजरिये में सुधार लाना होगा। हम पद, पैसा और प्रतिष्ठा का मोह छोड़कर हम सार्वजनिक हित का सर्वोपरि मानकर चलें। वह जवानी, जवानी नहीं है,जिसमें कोई आसाधारण उपलब्धि न हो। जिसके पास तरह-तरह के हुनर हैं,वहीं समाज का नेतृत्व कर सकता है। व्रत, उपवास, पूजा-पाठ से आत्मिक सुधार होता है। हमें राम बनना है, रावण नहीं। हमें राम के आदर्श, चरित्र से सबक सीखना चाहिये। ईश्वर ने हर व्यक्ति को अपने जैसा बनाया है। मनुष्य अच्छे कर्म करके इंसान से भगवान बन सकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों के सदस्य एवं पदाधिकारी मौजूद थे।

स्तन कैंसर की स्व पहचान करने की जानकारी देने के लिये दो दिवसीय शिविर 17 फरवरी से

स्तन कैंसर की स्व पहचान करने की जानकारी देने के लिये दो दिवसीय शिविर 17 फरवरी से

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इन्दौर | 14-फरवरी-2017
 
    स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाला प्रमुख कैंसर है। इस कैंसर की अगर समय पर पहचान हो जाये तो इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। स्तन कैंसर की पहचान महिलायें स्वयं भी कर सकती हैं। स्तन कैंसर की पहचान स्वयं कैसे करें? इसकी जानकारी देने के लिये राबर्ट नर्सिंग होम में 17 और 18 फरवरी को दो दिवसीय शिविर आयोजित किया गया है।
    राबर्ट नर्सिंग होम के अधीक्षक और प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.विजयसेन यशलहा ने बताया कि इस शिविर में महिलाओं को स्तन कैंसर की स्व पहचान के तरीके बताये जायेंगे। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही ग्रीवा कैंसर की जांच भी नि:शुल्क की जायेगी। उन्होंने बताया कि कैंसर शब्द दिमाग में आते ही एक ही छबि उभरती है,कष्टदायक मृत्यु। कैंसर होने के सूचना मात्र से ही रोगी में निराशाभाव आ जाता है। डॉ.यशलहा ने बताया कि स्तन कैंसर के क्षेत्र में यह एक अच्छी बात है कि इसके ठीक होने की संभवना ज्यादा होती है। स्तर कैंसर का पता पहले या दूसरे चरण में चल जाता है तो उसके शरीर के अन्य अंगों में फैलने से रोका जा सकता है। स्तन कैंसर से बचने का सबसे पहला कदम जागरूकता है। जागरूकता से ही कष्टदायक स्तन कैंसर से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर के साधारण लक्षण स्तन या बांह के नीचे गाठ होना, स्तन से तरल पदार्थ निकलना, निप्पल अंदर घुस जाना, स्तन में सूजन, स्तन के आकार में बदलाव, स्तन को दबाने पर दर्द न होना आदि है। डॉ.यशलहा ने बताया कि स्तन कैंसर के संबंध में जनजागरूकता लाने के लिये लगातार प्रयासरत हैं। इसी सिलसिले में यह दो दिवसीय जागरूकता शिविर और ग्रीवा के कैंसर की जांच के लिये लगाया जा रहा है।

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