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बुधवार, 15 सितंबर 2021

सी एम हेल्पलाइन पर दे रहे थे पुलिस वाले फर्जी जवाब , न्याय बंधु ने लिखा पत्र , मुख्यमंत्री ने लिया एक्शन , कार्यवाही के लिये मुरैना कलेक्टर को भेजा मामला

 मुरैना 15 सितंबर ( ग्वालियर टाइम्स ) लगातार 20 साल तक कोर्ट और कानून की ऑंखों में धूल झोंक कर भारी भरकम रिश्वत और भ्रष्टाचार की विष्ठा खा रहे और सरकारी धन के गबन और जालसाजी तथा कूटरचना सहित हरिजन एक्ट और डकैती के आरापियों को बचाने में एक के बाद एक पुलिसिये सिलसिलेवार लगे हुये थे और खुलेआम कानून और पुलिस महकमे को चैलेंज कर रहे थे कि पकड़ के दिखाओ , अंतत: कानूनी कार्यवाही की जद में बीस साल बाद आ ही गये । 

नरेन्द्र सिंह तोमर '' आनंद'' एडवाकेट 

अपने ही कर्मों से आये पकड़ में खाकी की आड़ में छिपे रिश्वतखोर चोर 

20 साल पहले सिटी कोतवाली मुरैना में एक एफ आई आर दर्ज हुई थी , जिसका चारों ओर अखबार में बड़ा भारी प्रचार और शोर था । मामला एक ऐसे जिला शिक्षा अधिकारी से जुड़ा था जो सबसे खौफनाक और दहशत का दूसरा नाम माना जाना और समझा जाता था , जिसके नाम की तूती बोलती थी भोपाल से लेकर कमिश्नर चंबल और कलेक्टर मुरैना तक उसे गुड मार्निंग सर बोला करते थे , पूरी पुलिस और पुलिस अधिकारी जिसकी सेवा और चमचागिरी किया करते थे । 

उसकी दहशत और खौफ इतना था मुरैना जिला में उस वक्त कि पोरसा से श्योपुर तक जिस भी सड़क या राह पर वे निकल जाते उसी तरफ के स्कूलों में कर्फ्यू लग जाता था , 800 से ज्यादा स्कूलों के अनुदान उनने मात्र एक झटके में केवल एक प्रतिवेदन देकर बंद करा दिये । स्कूल की और स्कूल संचालकों  , स्कूल स्टाफ के परिवारों की हालत खस्ता कर दी , भुखमरी फैला दी , बेरोजगारी के साथ भुखमरी से जूझ रहे स्कूलों पर उनका एक और कहर टूूूटा जो कि सन 1996 में शुरू हुआ और वह था फर्जी छात्रवृत्ति कांड , 1996 - 97 में उनने दौड़ते हांफते कुल 42 एफ आई आर छात्रवृतति कांड की दर्ज करा दीं , जिनकी बाद में संख्या बढ़कर 46 हो गयी । 

शिक्षा विभाग मुरैना के बाबूओं से लेकर सरकारी शिक्षकों , बी ई ओ , आदिम जाति कल्याण विभाग के बाबूओं , अफसरों सहित प्राइवेट स्कूलों की संस्थाओं , अध्यक्षों , सचिवों की नामजद एफ आई आर दर्ज हुई ,प्रायवेट स्कूलों के स्टाफ  खिलाफ भी दर्जनों नामजद हुये , एक एफ आई आर में औसतन 6-7 लोग अभियुक्त बनाये गये । 

आखिर एक जगह एक एफ आई आर में संयोगवश किसी तहसीलदार ने एफ आई आर फर्जी छात्रवृत्ति की दर्ज कराई उसमें उनको भी नामजद मुलजिम बना दिया , वहीं से हंगामा उठ खड़ा हुआ , उन्होंने सीधे कलेक्टर मुरैना को पत्र लिखा , राजपत्रित अधिकारी संघ के नाम और लेटरपेड का भी सहारा लिया गया , खैर ये सोचने का विषय बना कि जिसने सैंकड़ों भले शरीफों को मुलजिम बना कर एफ आई आर दर्ज करा दीं , जब मात्र एक एफ आई आर में उसका नाम नामजद हुआ तो वह बुरी तरह से बौखला गये और अपना नाम झूठा जोड़े जाने तथा हटाये जाने हेतु न केवल कलेक्टर को पत्र लिखा बल्कि धुंआधार दवाब भी डाला , कलेक्टर ने उनके पत्र के ऊपर पत्र लिखा तथा पत्र में लिखा कि फर्जी छात्रवृत्ति के मामलों में झूठे नाम जोड़े  जाने की शिकायतें मिल रही हैं , किसी का भी झूठा नाम नहीं जोड़ा जाये , और अगर किसी का झूठा  नाम जोड़ा गया है , उसे हटाया जाये । 

संयोग से यह दोनों पत्र उनके भी और उनके भी हम तक किसी तरह से पहुंच गये । हमने इसे ही अपना प्वाइंट ऑफ एक्शन बनाया और लाइन ऑफ एक्शन में बुनियाद तैयार कर ली , खैर समय रहते इसे भी अन्य साक्ष्यों के साथ हाई कोर्ट में पेश किया गया । मगर इतना अवश्य हुआ कि जैसे ही एक एफ आई आर में उनका नाम आया , उसी दिन से मुरैना जिले में फर्जी छात्रवृत्ति कांड की  एफ आई आर दर्ज होना बंद हो गयीं । 

इन एफ आई आर में खैर होना जाना क्या था , पुलिस वालों को जब भी लाली लिपिस्टिक और चुनरी कुर्ता साड़ी ब्लाउज की जरूरत होती , किसी न किसी नामजद के यहॉं दविश डालने पहुंच जाते और दो चार हजार झटक कर उसे ठांस कर हडका भी आते कि आगे से सावधान रहना , साहब तेज और जल्दी कार्यवाही करने और तुम्हें अरेस्ट करने की कह रहे हैं । सो ध्यान रखना , पुलिस के लिये इन भले शरीफ मुलजिमों का चारों ओर समंदर भरा पड़ा था , सो सब थाने अपने अपने खर्चे के प्रति निश्चिंत थे । सब ठीक ठाक चल रहा था , लेकिन हर कहानी में पूर्ण विराम अवश्य ही एक दिन आता है । सो परेशान लोगों ने एक दिन हमारा दरवाजा खटखटा दिया , सबूतों के जखीरे लाकर पटक दिये हमारे सामने । औ हमने उस दहशत और खौफ का न केवल मुरैना जिला से अंत कर दिया बल्कि उन्हें पद से भी हटवा कर उनके मूल पद सहायक संचालक पर वापस पहुंचा दिया । बस इतनी सी कहानी है इस खास खबर की । 

इतने बड़े मुलजिम के अपराध भी काफी बड़े बड़े थे ,सो इतना सब आसान नहीं था , ऊपर से नीचे तक कोई भी अफसर , नेता , प्रशासन और पुलिस कोई भी न तो उसके खिलाफ सुनता था और न ही कोई कार्यवाही करता था । उस समय मोबाइल फोन और इंटरनेट वगैरह कुछ नहीं चलते थे सब काम मैनुअल ही होता था , बस इतना अच्छा था कि उस समय लॉकडाउन नहीं होता था  । 

थाने में उसके खिलाफ करीब 30-40 अपराधों के लिये एफ आई आर दर्ज करने का आवेदन दिया गया  , पुलिस अधीक्षक मुरैना को धारा 154(3) में भी आवेदन दिया गया , पावती ली गयी , वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों को सभी को आवेदन दिया गया , मगर किसी ने नहीं सुनी , न तो एफ आई आर दर्ज  की और न कोई कार्यवाही ही की , जिला न्यायालय मुरैना में भी परिवाद लगाया गया , उसे भी नहीं सुना गया । आखिकार ग्वालियर हाईकोर्ट में द प्र सं की धारा 482 के तहत याचिका लगी क्रमांक 1216/2001 , जैसे ही हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक मुरैना को , सी एस पी मुरैना और टी आई सिटी कोतवाली मुरैना को नोटिस जारी कर तलब किया , वैसे ही पुलिस तुरंत हरकत में आ गयी और मूवमेंट शुरू हो  गया , एस पी ने जांच की , अंतत: हाईकोर्ट ने उनके प्रतिवेदन और केस डायरी के आधार पर पुलिस अधीक्षक मुरैना के नाम आदेश जारी किया , कि एस पी सारे मामले को स्वयं खुद देंखें , एफ आई आर दर्ज करें , विवेचना करें और न्यायालय में रिपोर्ट ( प्रतिवेदन धारा 173 द प्र सं ) पेश करें । 

आखिर रातों रात सिटी कोतवाली मुरैना में पुलिस अधीक्षक के पत्र सहित एफ आई आर दर्ज की गयी , उस दिन तारीख थी 20 सितंबर 2002 , और दर्ज हुई एफ आई आर का नंबर था क्राइम नंबर 663/02 । इसकी कायमी की जानकारी मिलते ही उनके समर्थक और संरक्षक पुलिस वाले कोतवाली छोड़कर भाग निकले और उनने जाकर उनसे क्या मरसिये बांचें यह तो पता नहीं । एफ आई आर की पहली लाइन में ही पुलिस ने लिखा कि '' अपराध सिद्ध पाये जाने से यह एफ आई आर दर्ज की गयी '' 

इतने सबके बावजूद ऐन दो तीन महीने बाद भ्रष्ट और रिश्वत के अंधे टी आई ने उसमें खात्मा रिपोर्ट काट कर सी जे एम कोर्ट मुरैना में पेश कर दी , वहां सी जे एम ने टी आई को बुरी तरह से लताड़ लगाकर फटकारा और खात्मा रिपोर्ट वापस कर दी तथा अपराध की और विवेचना व अनुसंधान के आदेश दिये तथा हिदायत देते हुये कहा कि जब भी इसकी रिपोर्ट पेश करने आओ तो फरियादी और गवाहों को साथ लेकर आना उनके यहां न्यायालय में कथन / गवाही होगी उसके बाद ही आपकी किसी रिपोर्ट पर विचार किया जायेगा । 

बस तबसे यह केस पुलिस के पास आज तक लंबित पड़ा है । सरकारी धन के गबन , कूटरचना  जालसाजी , फर्जीवाड़े की धारायें तो इसमें पहले से दर्ज हैं 409, 420, 467, 468 , 471, 472 जैसी धारायें तो एफ आई आर 663/02 में कायमी दिनांक से ही अंकित हैं , मगर 80 मुलजिमों में से पुलिस आज दिनांक तक एक भी मुलजिम न तो पकड पाई और न गबन का पैसा सरकार को वापस दिला पाई और न गबन करने वालों को पकड़ पाई । उल्टे इस एफआई आर की केस डायरी कोर्ट से चुरा कर दुबकाती छिपाती और साक्ष्य सबूत नष्ट करने में लगी रही , हाईकोर्ट का आदेश , पुलिस अधीक्षक की मश्क्कत सबकों अपने जूतों तले रौंद कर रख दिया । 

अब मूल खबर पर आते हैं - ताजा वर्तमान मामला क्या है 

हुआ  कुछ यूं कि सन 2017 में इस केस एफ आई आर क्रमांक 663/02 का मामला न्याय विभाग ( विधि एवं कानून मंत्रालय ) भारत सरकार ने अपने स्थानीय न्यायबंधु ( प्रोबोनो लीगल सर्विसेज ) को सौंप दिया और इस पर पुलिस प्रशासन तथा न्यायालयों में , उच्च न्यायालय आदि में कार्यवाहीयां , ड्राफ्टिंग , पेश करना , लड़ना मुकदमा करना आदि सौंप कर अधिकृत कर दिया । न्यायबंधु ने सारे दस्तावेज और केस के इतिहास खंगाले , कड़ी से कड़ियां जोड़ीं , मामले की गंभीरता समझी और मामले में संज्ञान लेकर कार्यवाहीयां शुरू कीं । 

पता चला कि इस केस की कस डायरी में अंतिम अनुसंंधान और विवेचना सी आई डी ब्यूरो ग्वालियर द्वारा की गयी , 37 साक्षियों के कथन/ बयान ग्रहण किये गये , सरकारी धन के गबन की 5 मूल फाइलें जप्त की गयीं , द प्र संं की धारा 173 में चालान पेश करने की तैयारी सी आई डी आफिसर एम के शर्मा द्वारा की जा रही थी , उन्हें 15 लाख रूपये का ऑफर किया गया था केस बंद करने के लिये , उन्होंने इंकार कर दिया , उसी समय उनकी संदिग्ध परिस्थितयों  में मृत्यु हो गयी , न्यायबंधु ने अपने प्रतिवेदन में इसे हत्या किया जाना करार दिया । मृत्यु से पूर्व सी आई डी आफिसर एम के शर्मा ने केस की स्टेटस रिपोर्टें हस्तलिखित रूप में जिला एवं सत्र न्यायालय मुरैना में प्रस्तुत कीं , जिनकी प्रमाणित प्रतियां न्यायबंधु ने कोर्ट से हासिल कीं । 

न्याय बंधु ने सी एम हेल्पलाइन पर अनेक शिकायतें इस अपराध संख्या 663/02 के बारे में की तथा पुलिस को संभलने और त्रुटि सुधार के अवसर दिये , बार बार पुलिस द्वारा सी एम हेल्पलाइन को जाली व फर्जी कूटरचित उत्तर भेज कर शिकायतों को फोर्सली क्लोज कराया गया , केस अलाटमेंट की जानकारी गोपनीय रखते हुये , कानून विरूद्ध और अपराधीयों के संरक्षकों की पहचान का क्रम जारी रखा और खास सबूत की तलाश जारी रखी जिससे इन पुलिसकर्मियों का भांडाफोड मय सबूत किया जा सके । 

पुलिसकर्मियों ने अपने हर जवाब में एक खास प्रकरण का जिक्र किया जिसमें न्यायबंधु पहले से ही कोर्ट द्वारा म.प्र. शासन के साथ पिटीशनर ( फरियादी ) के रूप में न्यायालय द्वारा दर्ज हैं । न्यायबंधु ने इस खास प्रकरण के बार बार हवाले में आने और इस प्रकरण की दर्ज वर्ष 1999 के उपरांत दर्ज एफ आई आर सन 2002 को पुरानी एफ आई आर की आड़ में दबाने की कुत्सित चाल को पकड़ा । 

सन 1999 के मामले का अंतिम फैसला न्यायालय ने 22 जनवरी 2020 को सुना कर उस प्रकरण और उसकी एफ आई आर को समाप्त कर दिया । इसके उपरांत पुन: सी एम हेल्पलाइन पर शिकायतें की गयीं , लेकिन कोई प्रकरण कोर्ट में नहीं होने पर भी वही पूराना जवाब जस का तस बार बार सी एम हेल्पलाइन को दिया गया और कोर्ट द्वारा प्रकण समाप्त किये जाने और एफ आई आर समाप्त किये जाने के बाद भी , उस प्रकरण को कोर्ट में चालू , प्रचलित व संचालित बताते हुये लगातार 20 महीने बाद अब तक वही उत्तर दिया गया , न्प्यायबंधु नेपुलिस महानिदेशक , आई जी चंबल और पुलिस अधीक्षक मुरैना को माह जनवरी 2021 से 02 जुलाई 2021 तक अनेक  ई मेलें भेजकर अवगत करा दिया और संबंधित पुलिसकर्मियों के विरूद्ध एफ आई आर दर्ज किये जाने का अनुरोध किया । इस विषय में नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर पुलिसकर्मियों तथा अन्य लोगों को नामजद कर मामला दर्ज कया गया , एक पुलिस इंटीमेशन म प्र पुलिस के आफिशियल पोर्टल पर नामजद दिनांक 12 जनवरी 2021 को दर्ज की गयी । दिनांक 19 जुलाई 2021 को पुन: पुलिसकर्मयों ने सी एम हेल्पलाइन पर अपना जवाब दोहराया , कापी पेस्ट किया , न्यायबंधु ने इसी जवाब को आधार मान कर न्यायालयीन कार्यवाही शुरू कर दी , और पाया कि कोर्ट में 20 माह पूर्व समाप्त प्रकरण की , पुलिसवालों ने जाली आदेश का कृत्रिम कूटरचना कर एक नकली व फर्जी न्यायालय का आदेश तैयार किया है तथा कूटरचित व जाली न्यायालयीन कार्यवहीयां एवं आदेश पत्रिकायें तैयार की हैं । जिनका इस्तेमाल सी एम हेल्पलाइन पर जवाब देने में और वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों एवं प्रशासन व शासन को गुमराह एवं भ्रमित करने के लिये किया जा रहा है । 

न्यायालयीन कार्यवाही के प्रथम प्रक्रम पर 14 सितम्बर 2021 को न्यायबंधु ने एक विधिक आवेदन पुलिसवालों के विरूद्ध धारा 166 (क) , 217 सहित न्यायालय के आदेश एवं कार्यवाहियों की कूटरचना करने व जालसाजी छल कपट व धोखाधड़ी़ से मिथ्या साक्ष्य के रूप में उनका सी एम हेल्पलाइन तथा वरिष्ठ पुलिस , प्रशासन , शासन के अधिकारीयों को गुमराह व भ्रमित करनेे के लिये किया गया है । अत: इन धाराओं में भी इनके विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर निलंबित कर गिरफ्तार किया जाये । साथ ही सिटी कोतवाली मुरैना में दर्ज अपराध संख्या 663/02 में इनको सह अभियुक्त के रूप मे दर्ज कर नामजद किया जाये एवं इसमें न्यायालय में अविलंब चालान पेश किया जाये । 

न्यायबंधु ने अपना यह विधिक आवेदन पुलिस महानिदेशक , मुख्यसचिव , मुख्यमंत्री म; प्र; शिवराज सिंह चौहान , आई जी चंबल तथा ए पी मुरैना को भेजा था साथ ही न्यायालय की केस स्टेटस रिपोर्टें और केस संबंधी अन्य दस्तावेज और आर्डरशीटें भेजी थीं , जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा तुरंत कार्यवाही करते हुये उसी दिन 14 सितम्बर 2021 को ही सारा मामला मुरैना कलेक्टर को कार्यवाही करने / एक्शन लेने हेतु भेजा है । न्यायबंधु इस के उपरांत प्रकरण को न्यायालय में दाखिल करेंगें , अगर पुलिस एफ आई आर होती है तो म प्र शासन की भी पैरवी स्वयं करेंगें और यदि पुलिस एफ आई आर नहीं करती तो न्याया विभाग भारत सरकार की ओर से न्यायबंधु के रूप में जिला अदालत और डचच न्यायालय मे केस दर्ज करायेंगें । और भारत सरकार की ओर से इन सब पर केस चलाया जायेगा ।          

 

शनिवार, 28 अगस्त 2021

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना 2.0 अन्तर्गत निर्धन परिवारो को निःशुल्क गैस कनेक्षन प्रदाय करने के संबंध में दिशा निर्देश जारी

 भिण्ड 28अगस्त 2021 । प्रधानमंत्री उज्जवला योजना 2.0 दिनांक 07 सितम्बर 2021 को पूरे प्रदेश में समारोह पूर्वक लॉन्च की जाना प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान उपस्थित रहेगे तथा प्रधानमंत्री जी की वर्चुअली जुड़ने की संभावना है। कार्यक्रम का प्रसारण पूरे राज्य में किया जायेगा 07 सितम्बर 2021 से पूर्व प्रदेश में 6 लाख हितग्राहियों के KYC क्लियर कर e-KYC  उपरांत गैस कनेक्शन जारी किये जायेंगे इन उपभोक्ताओं को समारोह/कार्यक्रम के दौरान एवं उसके उपरांत गैस कनेक्शन प्रदाय किये जायेगे। उक्त कार्यवाही हेतु कलेक्टर डॉ सतीष कुमार एस ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भिण्ड एवं परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण भिण्ड को पत्र जारी कर निर्देशानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए है।

   निर्देशानुसार जिले में वितरकों के पास पूर्व से जमा KYC एवं नवीन आवेदनों की सतत रूप से समीक्षा कर प्रत्येक आवेदनकर्ता परिवार से आवश्यक दस्तावेज जमा कराये जाकर वितरक के स्तर से KYC क्लियर की जायेगी। KYC क्लियर होने के उपरांत वितरक के स्तर से ही आवेदनकर्ता से बायोमेट्रिक सत्यापन अथवा OTP के माध्यम से e-KYC  करायी जायेगी। इस हेतु समस्त वितरकों के पास बायोमेट्रिक डिवाइस उपलब्ध है। OTP के माध्यम से e-KYC  किये जाने हेतु आवेदनकर्ता के आधार नंबर में उसका सही मोबाईल नंबर दर्ज होना आवश्यक है आधार नंबर में सही मोबाईल नंबर का अपडेशन आधार की वेबसाईट uidai.gov.in  पर किया जा सकता है अथवा आधार सेन्टर, कॉमन सर्विस सेन्टर (CSC) एमपी ऑनलाइन कियोस्क आदि के माध्यम से कराया जा सकता है।
   आवेदनकर्ता हितग्राहियों के e-KYC  कराने हेतु ग्राम पंचायत/वार्ड स्तर पर आवश्यक सहयोग करने हेतु नगरीय निकाय, ग्राम पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाये। स्थानीय उचित मूल्य दुकान के विक्रेताओं को उपरोक्त कार्य संयोजित किया जाये। जिला स्तर पर पदस्थ कंपनी के नोडल अधिकारी एवं जिला आपूर्ति नियंत्रक/ अधिकारी यह सुनिश्चित करेगे कि हितग्राहियों को गैस कनेक्शन प्रदाय करने हेतु पर्याप्त मात्रा में ऐसेसरीज (गैस सिलेण्डर गैस चूल्हा, रेग्यूलेटर, सुरक्षा पाईप आदि) उपलब्ध हो। जिला स्तर पर पदस्थ कंपनी के नोडल अधिकारी योजना के संबंध में पात्रता आवश्यक दस्तावेज, आवेदन कहा जमा कराना है। योजना की जानकारी हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी कराई जाये एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया के माध्यम से योजना का पर्याप्त प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित किया जाये।
   कंपनी के जिला नोडल अधिकारी आवेदन पत्र प्रारूप/ 14 विन्दुओं का घोषणा पत्र की पर्याप्त कॉपी जिला आपूर्ति अधिकारी को उपलब्ध करायेगे, जिला आपूर्ति नियंत्रक/ अधिकारी उचित मूल्य दुकान के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत/वार्ड स्तर पर ऐसे आवेदन पत्रों की प्रति संधारित करेगें एवं पात्र हितग्राही से भरे हुए आवेदन एकत्रित कर संबंधित गैस वितरक के पास जमा करायेगे।
   कंपनी के अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया है कि योजना के प्रचार-प्रसार के संबंध में स्थानीय स्तर पर आवेदन भरवाने e-KYC  के लिये केम्पों का आयोजन किया जा रहा है इन केम्पों की सूचना जिला नोडल अधिकारी द्वारा जिला आपूर्ति अधिकारी को दी जायेगी, ताकि अधिक से अधिक संख्या में हितग्राहियों को योजना की जानकारी दी जा सके। योजना के संबंध में NIC भोपाल के स्तर से पंजीकृत उपभोक्ताओं को  SMS  के माध्यम से भी अवगत कराया जायेगा। जिला स्तर पर क्लियर KYC एवं e-KYC  की प्रतिदिन की रिपोर्ट जिला नोडल अधिकारी के माध्यम से संबंधित कंपनी के समन्वयक समस्त कंपनियों की प्रतिदिन की रिपोर्ट एकजाई कर जिला कार्यालय को प्रेषित करेगे।

बैंकर्स आपदा की घडी में बिना विलम्ब के प्रकरण स्वीकृत कर वितरण करें-कलेक्टर श्योपुर


 
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि श्योपुर जिले में अगस्त माह के प्रथम सप्ताह के दौरान अतिवृष्टि और बाढ़ से कई परिवार पीडित हुए है। जिनकों इस आपदा की घडी में बिना विलम्ब के प्रकरण स्वीकृत कर शीघ्र वितरण करने की कार्यवाही करे। जिससे हितग्राही प्राप्त किये गये ऋण से अपनी आजीविका चलाने में सहायक बन सकें। वे आज विभिन्न योजनाओ के अंतर्गत हितग्राहियों को लाभ दिलाने की दिशा में कलेक्टर कार्यालय के सभागार में आयोजित बैंकर्स की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री राजेश शुक्ल, अपर कलेक्टर श्री टीएन सिंह, एसडीएम श्री विनोद सिंह, एलडीएम श्री योगेन्द्र सिंह, डीपीएम एनआरएलएम श्री सोहनकृष्ण मुदगल, जीएसडीआईसी श्री एसआर चौबे, सहायक संचाकल उद्यान श्री पंकज शर्मा, सीएमओ नगरीय निकाय श्योपुर श्री बीडी कतरोलिया, बडौदा श्री ताराचंद धूलिया अन्य विभागीय अधिकारी और विभिन्न बैंको के जिला स्तरीय शाखा प्रबंधक उपस्थित थे।
    कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने कहा कि आपदा के कारण शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों को क्षति पहुंची है। ऐसी स्थिति में जिन-जिन बैंको में हितग्राही मूलक योजना के अंतर्गत लक्ष्य दिये गये है। उनमें स्वीकृति जारी कर प्रकरण में हितग्राही को शीघ्र ऋण राशि प्रदान करने की कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि शहरी क्षेत्रो में मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना में 10 हजार रूपयें का ऋण देने के लिए हितग्राहियों के प्रकरण बैंको के अंदर लबिंत पडे है। उनमें तत्काल स्वीकृति जारी कर हितग्राहियों को यूनिट से संबंधित लोन उपलब्ध कराया जावे। जिससे हितग्राही अपना कारोबार प्रारंभ कर आर्थिक स्थिति सुधारने में सक्षम बन सकें। उन्होने कहा कि जिन बैंको द्वारा हितग्राही मूलक योजना के लक्ष्यपूर्ति में टारगेट को पूरा किया है। ऐसे बैंकर्स बधाई के पात्र है।
    कलेक्टर ने कहा कि हितग्राही मूलक योजना के अंतर्गत श्योपुर जिला विगत वर्ष प्रदेश के जिलों में टॉप 03 में पहुंच गया था। इस व्यवस्था को इस वित्तीय वर्ष में भी लागू रखा जावे। जिससे यह जिला प्रथम श्रेणी में आकर नाम रोशन करेगा। उन्होने कहा कि बैंकर्स भी श्योपुर जिलें में रहकर यहां की मूलभूत सुविधाओं से बाखिफ है। इसलिए बिना विलम्ब के विभिन्न विभागो के प्रस्तुत किये गये प्रकरणों में हितग्राहियों को लाभ पहुंचाये। उन्होने कहा कि स्वसहायता समूह की महिला, दीदी अपने-अपने क्षेत्र में अच्छा काम रही है। उनके सम्मान को कायम रखने के लिए बैंक में लगाये गये प्रकरणों में मदद की जावे। साथ ही बैंक में आने पर उनका सम्मान किया जावे।
    कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत सभी बैंकर्स लंबित प्रकरणों का निराकरण करते हुए येाजना से संबंधित व्यक्तियों को लाभ पहुंचाये। जिससे आपदा की इस घडी में हितग्राही लाभान्वित होकर अपने परिवार की आजीविका चलाने में सक्षम बन सकें। उन्होने कहा कि विभागीय अधिकारियों द्वारा जिन-जिन बैंको में टारगेट दिये गये है। उन टारगेटों में शत प्रतिशत ऋण वितरण की कार्यवाही की जावे।
    उन्होने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार अतिवृष्टि एवं बाढ़ आपदा में पीडित परिवारों को मदद पहुंचाने की दिशा में सहायता राशि पहुंचाने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी प्रकार सभी बैंको के शाखा प्रबंधक आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक जिला-एक उत्पाद के प्रकरणों में स्वीकृति प्रदान करें। जिससे हितग्राही विकास की दिशा में निंरतर प्रगति की ओर रफ्तार बढा सकें। उन्होने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से 930 प्रकरण 55 करोड़ रूपयें के बैंको की विभिन्न शाखाओ में लगाये गये है। जिनमें से 38 करोड रूपयें की स्वीकृति बैंकर्स द्वारा जारी की गई है। उनमें राशि वितरण करने की कार्यवाही की जावे।
    बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री राजेश शुक्ल द्वारा ग्रामीण विकास और आजीविका मिशन के माध्यम से कई प्रकरण बैंको में प्रस्तुत किये गये है। इन प्रकरणों में दिये गये टारगेट के अनुसार वितरण की कार्यवाही शीघ्र की जावे। बैठक में डीपीएम आजीविका मिशन श्री सोहनकृष्ण मुदगल, महाप्रबंधक उद्योग श्री एसआर चौबें, सीएमओ नगपालिका श्योपुर श्री बीडी कतरोलिया एवं बडौदा श्री ताराचंद धूलिया ने विभिन्न बैंको में हितग्राही मूलक योजनाओ के प्रस्तुत प्रकरणों की जानकारी दी।  

वरिष्ठ नागरिकों की सहायता हेतु राष्ट्रीय हेल्पलाईन 14567 स्थापित

 मुरैना 28 अगस्त 2021 ।  यदि कोई वरिष्ठ नागरिक बेघर अवस्था में हो अथवा उनके साथ दुर्वव्यवहार हो रहा है तो टोल फ्री नंबर 14567 पर कॉल कर सूचित करें ताकि वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा एवं आवश्यक सेवाएं तथा उनकी देखभाल की जा सकें। कोई वरिष्ठ नागरिक बेघर अवस्था में हो अथवा उनके साथ दुर्व्यवहार हो रहा है तो टोल फ्री नंबर 14567 पर कॉल करें, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा एवं आवश्यक सेवाएं तथा उनकी देखभाल की जा सकें। साथ ही ऐल्डर हेल्पलाईन नंबर 14567 का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें। 

शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने वाली सर्वाधिक ग्राम पंचायतों के मामले में जबलपुर प्रदेश में अव्वल

 शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने वाली ग्राम पंचायतों की संख्या के मामले में जबलपुर जिला प्रदेश में अव्वल है। अब तक जबलपुर की रिकार्ड 123 ग्राम पंचायतों की सौ-फीसदी आबादी को कोरोना का टीका लग चुका है।

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हाल ही में जबलपुर जिले की शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने वाली ग्राम पंचायतों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया है। उन्होंने सौ-फीसदी टीकाकरण कराने वाली ग्राम पंचायतों की न केवल हौसला अफजाई की बल्कि अन्य पंचायतों को इनका अनुसरण करने की बात कही।
    जिले की सौ-फीसदी वैक्सीनेटेड ग्राम पंचायतों में विकासखण्ड पनागर की 18 ग्राम पंचायत, जबलपुर की 11, कुण्डम की 10, शहपुरा की 9, मझौली की 24, पाटन की 28 ग्राम पंचायत और विकासखण्ड सिहोरा की 23 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने इस सभी पंचायतों के ग्रामीणों को इस विशिष्ट उपलब्धि के लिये बधाई दी है।
    गुरूवार को जिले की सौ-फीसदी वैक्सीनेटेड होने वाली ग्राम पंचायतों में जबलपुर की 5, पनागर की 9, मझौली की 4, कुण्डम की दो, सिहोरा की 7 और पाटन विकासखण्ड की 22 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनको मिलाकर अब जिले की कुल 123 ग्राम पंचायतों की शत-प्रतिशत आबादी को टीका लग गया है।
     विकासखण्ड पाटन की ग्राम पंचायत बिनैकी के 937 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत डुंगरिया के 1362 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत तमोरिया के 1175 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत घटेरा के 1034 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत जरोंद के 997 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत करारी मनकवारा के 1198 लोगों को, ग्राम पंचायत मुर्रई के 1137 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत खमोंद के 1521 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत ग्वारी के 1426 लोगों को, ग्राम पंचायत मादा के 1428 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत कैथरा के 1109 लोगों को, ग्राम पंचायत सहसन पड़रिया के 1030 व्यक्तियों को , ग्राम पंचायत गनियारी के 932 लोगों को, ग्राम पंचायत सरौंद के 1181 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत दिघौरा के 1073 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत पौड़ी छपरी के 1413 व्यक्तियों को , ग्राम पंचायत गुरूपिपरिया के 980 व्यक्तियों को, ग्राम पंचायत पाटन के 1956 व्यक्तियों को और विकासखण्ड शहपुरा की ग्राम पंचायत पिपरिया कनवास के 1439 व्यक्तियों को टीका लग चुका है।
    इन सभी पंचायतों में टीकाकरण के लिये शेष लोगों में गर्भवती, मृत व्यक्ति और ग्राम से बाहर निवासरत लोग शामिल हैं। संबंधित ग्राम पंचायतों ने स्वयं शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया है।

दक्षता बढ़ाने के लिये विद्युत कंपनी के 15 जिलों के बिजली अधिकारियों को दिया जा रहा है ऑनलाइन प्रशिक्षण


इन्दौर | 27-अगस्त-2021
      मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अमित तोमर के निर्देश एवं मुख्य महाप्रबंधक श्री संतोष टैगोर के मार्गदर्शन में अधिकारियों की रिफ्रेशर ट्रेनिंग हो रही है। आन लाइन ट्रेनिंग में 15 जिलों के अधिकारी सहभागी रूप में शामिल हो रहे है। ट्रेनिंग 30 सितंबर तक चलेगी।
      मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संयुक्त सचिव श्री तरूण उपाध्याय ने बताया कि मानव संसाधन से जुड़े अधिकारियों की रिफ्रेशर ट्रेनिंग में सुबह विषय विशेषज्ञों की ओर से उद्बोधन दिया जा रहा है, प्रश्नोत्तरी के माध्यम से ट्रेनिंग लेने वालों की शंकाओं व जिज्ञासाओं का भी तुरंत समाधान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से ईआरपी, सेवानिवृत्ति, आउट सोर्स कर्मियों संबंधी, स्टोर,  रिवाल्विंग फंड, विद्युत दर, इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्टक्टर, बकाया राशि वसूली के लिए जब्ती, कुर्की, कार्यालय संरचना और कार्मियों के हितलाभ, वेतनमान, चिकित्सा भत्ते, साधारण अवकाश व संतान पालन अवधि अवकाश, कर्मचारी बीमा संबंधी अधिनियम,  अनुशासनात्मक कार्रवाई, संविदा एवं अनुकंपा नियुक्ति आदि विषयों पर जानकारी दी जा रही है। संयुक्त सचिव श्री उपाध्याय ने बताया कि इस ट्रेनिंग का उद्देश्य अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना एवं उन्होंने उपरोक्त विषयांतर्गत निपुणता प्रदान करना है, ताकि नई जिम्मेदारियों के समय उन्हें कार्य में आसानी हो। गुरूवार के ट्रेनिंग सत्र का संचालन श्रीमती सपना दामेशा ने किया। आभार माना श्रीमती रीना चौधरी ने।

कमलाराजा कन्या महाविद्यालय में विधि भवन प्रारंभ , देश में सबसे पहले हमने लागू की नई शिक्षा नीति - मंत्री यादव

 

शासकीय कमला राजा कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में जनभागीदारी मद से नवनिर्मित विधि भवन का लोकार्पण कार्यक्रम प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य,सांसद ग्वालियर श्री विवेक नारायण शेजवलकर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमआर कौशल, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी परिषद के सदस्य, महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं छात्रायें उपस्थित थे।
इस मौक़े पर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने उदबोधन में कहा कि आज इस नवनिर्मित विधि भवन के लोकार्पण से हमारी बेटियों को ओर सुविधा मिलेगी , वे यहाँ विधि विषय की पढ़ाई कर परिवार,प्रदेश एवं देश का नाम रोशन करेंगी। मंत्री श्री यादव ने कहा कि देश में सबसे पहले हमने मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति को लागू किया, इसके अंतर्गत 177 प्रकार के नए विषय है जो रोज़गार हेतु विद्यार्थियों को तैयार करेंगे। मंत्री श्री यादव ने कहा कि यह युग ज्ञान का युग है, इसलिए महाविद्यालय में विभिन्न प्रकार के ज्ञानवर्धक सम्मेलनो का आयोजन किया जाये, जिससे विद्यार्थियों को नई विधाओं को जानने का मौक़ा मिले। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण पठन-पाठन में हमने काफ़ी समस्यायों का सामना किया ,लेकिन इसके बावजूद भी हमने एक नए एवं सुरक्षित तरीक़े से परीक्षाओं को सम्पन्न कराया।मंत्री श्री यादव ने  महाविद्यालय के प्राचार्य सहित सभी प्राध्यापकों को नैक की ग्रेडिंग के लिए पूर्व से तैयारी करने को कहा,उन्होंने कहाँ की तैयारी अच्छे से रखे जिससे आपके महाविद्यालय को बेहतर नैक ग्रेडिंग प्राप्त हो।
कार्यक्रम को संवोधित करते हुए सांसद ग्वालियर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि कमला राजा महाविद्यालय ग्वालियर ही नही बल्कि प्रदेश का सबसे बड़ा एवं सर्वाधिक संख्या वाला कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय है। उन्होंने कहा कि  इस नये विधि भवन से महाविद्यालय को ओर अधिक सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने कहाँ आज हमारी बेटियाँ किसी से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में अपने परिवार, प्रदेश एवं देश का नाम रोशन कर रही है। सांसद श्री शेजवलकर ने कार्यक्रम में कहा कि महाविद्यालय को ओर बेहतर बनाने में कोई कमी नही छोड़ेंगे

बाढ़ प्रभावित परिवारों को जिला प्रशासन ने तात्कालिक राहत के रूप में नि:शुल्क राशन, मसाले एवं नए कपड़े मुहैया कराए

कलेक्टर ने की दानदाताओं से अपील, बाढ़ प्रभावित परिवारों को साफ-सुथरे और नए कपड़े ही वितरित करें

जिले में पिछले दिनों हुई अतिवृष्टि एवं बाढ़ से प्रभावित परिवारों को जिला प्रशासन द्वारा राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत राहत मुहैया कराई गई है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्कालिक रूप से जिला प्रशासन द्वारा 50 – 50 किलो नि:शुल्क खाद्यान्न, केरोसिन, मसाले, नए कपड़े, बांस-बल्ली व तिरपाल इत्यादि सामग्री उपलब्ध कराई गई है। साथ ही जिन लोगों के सामान का नुकसान हुआ है, उन्हें तात्कालिक रूप से 5 हजार और जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें तात्कालिक रूप से 6 हजार रूपए की आर्थिक राहत भी दी गई है।
    बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिये जिले के समाजसेवी एवं स्वयंसेवी संगठन भी आगे आए हैं। इनके द्वारा भी अपने स्तर पर बाढ़ प्रभावित परिवारों को विभिन्न प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। समाजसेवी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा दी जा रही सहायता में जिला प्रशासन का कोई दखल नहीं है। यह दान लेने वाले और दान देने वाले की सहमति के आधार पर हो रहा है। फिर भी कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आगे आईं निजी संस्थाओं से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित परिवारों को अच्छी गुणवत्ता की सामग्री और साफ-सुथरे व यथासंभव नए कपड़े ही प्रदान करें।
    कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत जिले में बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे का काम भी अंतिम चरण में है। जिन लोगों के मकान बाढ़ से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं उन्हें आरबीसी के प्रावधानों और मनरेगा के तहत एक लाख 20 हजार रूपए की कुल आर्थिक सहायता नए मकान बनाने के लिए मुहैया कराई जायेगी। इसी प्रकार फसल नुकसान का भी सर्वेक्षण कराया गया है। आरबीसी के प्रावधानों के अनुसार फसल नुकसान के लिये भी आर्थिक राहत जल्द ही वितरित की जायेगी।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ग्वालियर दुर्ग स्थित तेली का मंदिर, सास-बहू मंदिर के साथ ही राजा मानसिंह महल का किया अवलोकन

 

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने ग्वालियर किले पर स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातत्व महत्व के मंदिर व महलों को देखा और उनकी सराहना की। राज्यपाल श्री पटेल शुक्रवार को ग्वालियर प्रवास के दौरान शाम को ग्वालियर दुर्ग पहुँचे।
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने ग्वालियर किले पर स्थित तेली का मंदिर, सास बहू का मंदिर, अस्सी खम्बों की इमारत तथा राजा मानसिंह महल का अवलोकन किया। इस मौके पर संभागीय आयुक्त श्री आशीष सक्सेना, आईजी श्री अविनाश शर्मा, कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल को भ्रमण के दौरान शासकीय गाइड श्री सुरेश चौरसिया ने तेली का मंदिर, सास-बहू का मंदिर तथा अस्सी खम्बों की इमारत के साथ ही राजा मानसिंह महल के पुरातत्व और ऐतिहासिक महत्व के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। राज्यपाल ने भ्रमण के दौरान ग्वालियर दुर्ग के पुरातात्विक महत्व और ऐतिहासिक महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने इस ऐतिहासिक इमारतों और मंदिरों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।
    केन्द्रीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने राज्यपाल को बताया कि ग्वालियर दुर्ग पर राष्ट्रीय पुरातत्व विभाग और राज्य पुरातत्व विभाग के ऐतिहासिक महल एवं मंदिर स्थित हैं, जिनकी देखरेख दोनों ही संस्था द्वारा की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्वालियर दुर्ग पर ही ऐतिहासिक संग्रहालय भी स्थित है। इस संग्रहालय में वेशकीमती पुरा संपदा मौजूद है

मंगलवार, 24 अगस्त 2021

भाजपा का राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक अभियान प्रशिक्षण वर्ग सम्पन्न, *"कोराना मुक्त व वैक्सीन युक्त" बनाएंगे भाजपा के स्वास्थ्य स्वयंसेवक

 

कोरोना की तीसरी लहर के प्रभाव को रोककर आम जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक अभियान संचालित करने जा रही है। इसके अंतर्गत  प्रशिक्षित स्वास्थ्य स्वयंसेवक अपनी सेवाएं प्रदान कर आपदा को रोकने व जनजागरण का कार्य करेंगे। नगर के मंडल वार्डों में भाजपा के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की टीम सक्रिय रहेगी। यह बात भारतीय जनता पार्टी नगर जिला प्रभारी श्री विष्णु खत्री ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक अभियान के एक दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में कही। 

सह मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा के अनुसार  श्री खत्री ने कहा कि आज देश के सबसे साक्षर प्रदेश केरल में कोरोना के दस हजार से अधिक मरीज मिल रहे है वंही  मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान के द्वारा उठाए गए कदमों व निर्णयों के कारण कोरोना नियंत्रण में है ।  कोरोना काल में 135 करोड़ की आबादी में 80 करोड़ लोगों तक खाद्यान्न देने का कार्य अगर किया है तो वो मोदी जी ने किया है । यह प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरगामी सोच का ही परिणाम है कि देश में स्वदेशी वैक्सीन के माध्यम से अब तक करीब 55 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है।  आने वाले दिनों में यदि तीसरी लहर आती है तो उसके लिए भी हम हर प्रकार से तैयार रहेंगे। आज यह प्रशिक्षण इसीलिए आयोजित किया गया है ।
प्रशिक्षण वर्ग को सम्बोधित करते हुए नगर अध्यक्ष श्री विवेक जोशी ने कहा कि उक्त अभियान में शामिल स्वास्थ्य स्वयंसेवक का कार्य कोरोना कि यदि आपदा आती है तो आम जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का होगा । नगर के 9 मण्डलों में प्रत्येक मंडल में 4-4 स्वास्थ्य स्वयंसेवक बनाये गये है  । उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की पंचनिष्ठाओं पर ही हमारी सारी योजनाएं बनती है हमारी विचारधारा के कारण ही भाजपा को अन्य दलों से अलग बनाती है । इस दौरान कार्यक्रम में विशेष रूप से विधायक श्री पारस जैन उपस्थित थे । उन्होंने कहा कि योग को अपने जीवन में उतारना बहुत आवश्यक है । योग ही निरोगी काया रख सकता है साथ ही मास्क का उपयोग भी करना है । अभियान के जिला संयोजक श्री अमित श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य स्वयंसेवकों की भूमिका विषय पर सत्र को सम्बोधित किया । इस अवसर पर योगाचार्य मिलिंद्र त्रिपाठी ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने संबंधी जानकारी देकर प्रशिक्षण दिया साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य स्वयंसेवकों को योग एवं आसन का प्रशिक्षण दिया। कोरोना काल मे  स्वास्थ्य स्वयंसेवकों की सोशल मीडिया पर सकारात्मक भूमिका व तकनीकी की विस्तार विषय पर श्री खगेश सेंगर ने प्रशिक्षण वर्ग में सत्र को संबोधित किया ।  
कार्यक्रम में प्रशिक्षण वर्ग प्रभारी श्री अमित श्रीवास्तव, डॉ अनिल सर्राफ, श्री संजय अग्रवाल,  श्री खगेश सेंगर, श्री अजय तिवारी, पर्वतसिंह जाट, राजकुमार बंशीवाल, मनीष चौहान , जितेंद्र कुमावत, परेश कुलकर्णी सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे । प्रशिक्षण वर्ग का संचालन श्री सुरेश गिरी ने किया ।
प्रशिक्षण वर्ग के पश्चात नवनियुक्त प्रदेश प्रवक्ता श्री राजपालसिंह सिसोदिया, डॉ सनवर पटेल, सह मीडिया प्रभारी श्री सचिन सक्सेना, किसान मोर्चा प्रदेश मंत्री श्री भंवरसिंह चौधरी, अंत्योदय प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक श्री रामेश्वर दुबे, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश मंत्री श्री मुर्तजा अली बड़वाहवाला, महिला मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती मीना जोनवाल, अपेक्षा शुक्ला, अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री मुकेश ततवाल, प्रदेश मंत्री श्री विक्रम गोंदिया का स्वागत सम्मान किया गया । 

सोमवार, 26 जुलाई 2021

सी एम हेल्पलाइन में कोई भी शिकायत फोर्सली क्लोज नहीं करें - कलेक्टर

सीएम हेल्पलाइन में गति लायें , कोई भी ** *शिकायत फोर्सली क्लोज न करें , आवेदक की संतुष्टि के बाद ही क्लोज करें* -* कलेकटर कार्तिकेयन

मुरैना 26 जुलाई 2021/ कलेक्टर श्री बी कार्तिकेयन समस्त अधिकारियों को निर्देश दिये है कि 23 अगस्त को मुख्यमंत्री व्हीसी आयोजित की जा रही है। जिसमें एजेण्डानुसार मुख्यमंत्री समीक्षा करेंगे। समीक्षा के दौरान सीएम हेल्पलाइन भी एजेंडा में शामिल है। कलेक्टर ने कहा कि पिछली मार्च में भी हुयी सीएम व्हीसी के प्रोसेडिंग पर समीक्षा की जायेगी। अधिकारी पिछली व्हीसी की तैयारी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कलेक्टर ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें 10 हजार के करीब पहुंच चुकी है। जबकि फरवरी में लगातार समीक्षा की गई थी। यह आंकड़ा मात्र 7 हजार तक आ गया था। कलेक्टर ने कहा कि अधिकारी इन पर विशेष ध्यान दें। सीएम व्हीसी तक शिकायतें कम पोर्टल पर दिखनी चाहिये। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी जुलाई माह में शिकायतों को फोर्सली क्लोज न करें, क्योंकि फोर्स क्लोज करने पर जिले की रैकिंग घट जाती है। इसलिये जुलाई माह में अधिकतर शिकायतों को संतुष्टि के साथ पूर्ण कराने का प्रयास करें।

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*अधिकारी जनसुनवाई के दौरान अपने दफ्तर में मौजूद रहें - कलेक्टर*
मुरैना 26 जुलाई 2021/ शासन स्तर से जनसुनवाई करने के अभी आदेश प्राप्त नहीं है। किन्तु लोगों की समस्या हल करना हम सबका दायित्व है। इसलिये मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान समस्त अधिकारी प्रातः 11 से 1 बजे तक अपने-अपने कार्यालयों में बैठकर जो भी लोग आवेदन लेकर आते है, उन आवेदनों को प्राप्त करे और उनका निराकरण करने का प्रयास करें। लोग आवेदन लाकर वापस नहीं जायें, वे निराश होकर न लौटें है। कलेक्टर ने कहा कि जिले में माफिया अभियान की कार्रवाही हर सप्ताह होनी चाहिये। जिसमें रेत, पत्थर, फूड, भूमि अतिक्रमण आदि शामिल है। 
ग्वालियर टाइम्स /26 जुलाई 21

रविवार, 11 जुलाई 2021

चम्बल का मुरैना जिला फिर बना जातिवादी संघर्ष का रणक्षेत्र

 जातिवाद की नाव में अफसर नेता और मीडिया हुये सवार , जब यू नहीं तो यूं सही डकरा डकरा ढरका रहे सरकार

चम्बल का मुरैना जिला फिर बना जातिवादी संघर्ष का रणक्षेत्र , जातिविशेष पर जातिविशेष का मारण और बदनामी का अभियान अब मीडिया में भी रंग दिखाने लगा

त्वरित सम-सामायिकी समाचार

नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’ आनन्द’’

 

मुरैना या चम्बल में जातिवाद यूं तो बहुत पुराना रोग है , हालांकि चम्बल के इतर या चम्बल से बाहर इसका इतना असर नहीं है , मगर चम्बल में यह जातिवाद कतिपय समयकाटू टुच्चे पुच्चे छिछोरे व लफंगे टाइप नेताओं और पत्रकारों द्वारा फैलाया जाता रहा है ।

अपने अपने क्षेत्र में कुंठित और बेनाम लोग या भयभीत व पूर्वाग्रहों से ग्रस्त चम्बल की माटी का कलंक अरसे से और बरसों से बने हुये हैं ।

दुर्भाग्य की बात यह है कि मीडिया के 95 प्रतिशत भाग पर एक जाति विशेष या समुदाय विशेष का कब्जा है और यह समुदाय विशेष अक्सर बीच बीच में अपना जातिगत अभियान राग छेड़ता रहता है ।

चाहे जगजीवन परिहार जैसे बागी का मामला हो, या अन्य मामले एक जातिगत अभियान छेड़ना इन सबका बरसों पुराना राग भैरवी है ।

जहां राग मल्हार गाना हो या राग ठुमरी लगाना हो वहां भी ये सब भैरवी ही अलापते हैं ।

हालिया कुछ घटनाओं का जिक्र करना प्रासंगिक होगा कि चाहे वह प्रशासन हो या पुलिस या मीडिया , जिस तरह से खुलेआम लोगों को मूर्ख बनाने के लिये लगातार एक मिशन के रूप में राग भैरवी अलापा गया उससे कोई अंधा या अज्ञानी भी बता देगा माजरा क्या है-

हालांकि हम किसी का विरोध या किसी का समर्थन नहीं करते , मगर वाकयों का जिक्र लाजिम है –

1.      एस डी एम राजीव समाधिया का स्थानांतरण – मुरैना की अंबाह तहसील में पदस्थ एस डी एम राजीव समाधिया का स्थानांतरण होते ही एक जाति विशेष के लोग खुलकर समाधिया के समर्थन में आये और एस डी एम का स्थानांतरण रद्द करने की मांग करने लगे , तमाश्श यह कि एक जाति विशेष के लोग , वैसे तो यह म.प्र. सिविल सेवा आचरण संहिता 1965 के प्रावधानों के एकदम खिलाफ और म.प्र. सिविल सेवा वर्गीकरण एवं नियंत्रण अपील नियमों 1966  के तहत कार्यवाही और दंडित किये जाने वाला परिभाषित अपराध है , मगर मीडिया ने तकरीबन रोजाना इस जाति विशेष के अभियान को सुर्खी बना बना कर छापा , और भी मजे की बात यह कि राजीव समाधिया ने इसका एकदिन भी खंडन या प्रतिरोध नहीं किया अर्थात वे इस सबसे सहमत थे और उन्हीं की मर्जी से यह सब किया जा रहा था , ऊपर से तुर्रा ये कि , उनके ऊपर कानून के पालनपोषणहार  जिला प्रशासन जो म.प्र सिवल सेवा आचरण संहिता और म.प्र. सिविल सेवा वर्गीकरण एवं नियंत्रण अपील नियम 1966 के तहत रोजाना मातहतों को नोटिस देकर गीदड़ भभकी दिया करते हैं उस जिला प्रशासन और संभागीय प्रशासन को इस बात की इत्तला ही हुई न कानोंकान खबर , शायद अखबार नहीं पढ़ते होंगें या फिर उन पर इन समाचारों की कटिंगें जनसंपर्क विभाग ने भेजी नहीं होंगी ।

2.      इसके बाद राजीव समाधिया के मामले में एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न यह उत्पन्न हो गया है कि उनके ट्रांसफर से एक जाति विशेष को विशेष तकलीफ क्यों पैदा हो गयी , जबकि प्रशासनिक अधिकारीयों के ट्रांसफर होना एक आम बात है और एक रूटीन प्रक्रिया है और इसमें किसी के विधवा विलाप की कोई परंपरा नहीं है , अंबाह क्षेत्र से हजारों शिकायतें ऊपर जातीं हैं मतलब साफ है , कुद तो गड़बड़ है , हर शिकायत के प्रति उस खंड का एस डी एम जिम्मेवार होता है बड़ी साधारण सी बात है भले ही आप किसी शिायत को बिना निराकरण फोर्सली क्लोज करायें , मगर शिकायत तो अपनी जगह कायम ही रहेगी । फिर यह तो जाहिर होता ही है कि जाति विशेष का विधवा विलाप बताता है कि वे एक जाति विशेष के लिये काम कर रहे थे , जनता या पब्लिक के लिये काम करते तो यह विलाप जनता करती , फिर क्यों न इसे जाति विशेष के लिये काम करने वाले अफसर के लिये जाति विशेष का अनाथ विलाप कहा जाये ।

3.      अंबाह में एक 5 साल की बच्ची की हत्या के मामले को एक जाति विशेष ने इस कदर उछाला और हंगामा किया कि मानों एक निर्भया कांड मुरैना में ही हो गया है , हत्यारे को फांसी दो , ये दो और वो दो , अखबारों ने भी इस पर रोजाना पन्ने रंगे , और बढ़चढ़ कर इसे नेशनल इश्यू बनाने की कोशिश की , और तो और 5 साल की बालिका के साथ दुष्कर्म भी बता दिया , आरोपी ने बयान दिया कि उसने दुष्कर्म नहीं किया , पुलिस ने कहा कि मेडिकल कराया है आरोपी का मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि आरोपी ने दुष्कर्म किया या नही , मगर सारी कहानी में बालिका के पोस्टमार्टम और उसमें दुष्कर्म की रिपोर्ट पाजिटिव या निगेटिव का किसी ने जिक्र नहीं किया जबकि बालिका के साथ दुषकर्म हुआ या नहीं इसके लिये बालिका की पी एम रिपोर्ट के बगैर कुछ नहीं होना जाना । मगर इसके बावजूद मीडिया ने और कतिपय जातिगत समूहों ने जबरन कैंडल मार्च और ये मार्च वो अप्रेल तमाम मई जून निकाल डाले , करिश्मे की बात ये हुई कि मुरैना जिला में ही उसी समय इसी प्रकार की अन्य थाना क्षेत्रों और तहसीलों में अन्य अनेक घटनायें बालिकाओं के साथ इसी प्रकार की घट गईं और उनमें तो बाकायदा दुष्कर्म किया भी गया , मगर न किसी ने मार्च , अप्रेल मई जून निकाले और न मीडिया ने उनका रोजाना जिक्र किया और न पन्ने रंगें ।  हालांकि आई पी सी में धारा 193% 199 तक का एक प्रावधान है कि न्याय के किसी भी प्रक्रम पर कुछ भी ऐसा किया जाये या कहा जाये कि जिस पर न्यायालय अपनी एक राय कायम कर ले , तो उसे मिथ्या साक्ष्य गढ़ना कहते हैं और इस प्रकार किसी को भी पुलिस केस दर्ज होने के बाद कुछ भी कहने पर वह मिथ्या साक्ष्य की श्रेणी में आता चला जाता है और उसे तदनुसार दंडित किया जाता है , मगर यह ुर्क भी साफ दिखाई दिया , इसमे भी जाति विशेष ही मुखर और चीखती रही । हम अंबाह के इस मामले में अपराध का कतई समर्थन नहीं करते लेकिन जातिविशेष द्वारा चलाई गई मुहिम को प्रश्नगत अवश्य करते हैं

4.      मुरैना सिटी कोतवाली टी आई आरती चराटे का मामला उल्लेखनीय अवश्य है कि आरती चराटे द्वारा कोतवाली टी आई का पदभार लेने के दूसरे तीसरे दिन से ही उनके खिलाफ खबरें और कुछ प्रायवेट गाड़ीयों के चित्र जाति विशेष के लोग छापने लगे थे कि प्रायवेट गाड़ी का इस्तेमाल करती है पुलिस , गश्त करती है पुलिस वगैरह वगैरह , बाद में आरती चराटे ने क्या गलती की यह तो पुलिस का आंतरिक मामला है मगर एक जाति विशेष का मीडिया और नेता आरती चराटे के पीछे पड़े थे इतना तो साफ जाहिर है । हमने लगातार इस मामले की आरती के ज्वाइंनिंग से लेकर हटाये जाने तक स्टडी की है इसलिये हम निष्कर्ष पूर्वक कह ही सकते हैं कि आरती जाति विशेष की टारगेट पहले दिन से ही थी ।

5.      पोरसा के कोंथर के फौजी धर्म सिंह तोमर का जमीनी मामला भी गजब है  ( हालांकि इस पर पूरी फिल्म धर्म सिंह तोमर की जुबानी , ग्वालियर टाइम्स अपनी अगली फिल्म में दिखाने जा रही है ) खास बात यह है कि एक ही जमीन – चार सीमांकन – हर सीमांकन में अलग अलग माप – गोया जमीन है कि चीन का नक्शा – कभी इधर बढ़ी तो कभी उधर बढ़ी तो कभी बेहड़ में निकल पड़ी , कभी दूसरे के खेत में 100 फीट तो कभी दूसरी जगह 200 फीट , जैसे केदारनाथ पर भीमसेन ने नंदी बने शंकर का भागते हुये कूबड़ पकड़ लिया तो केदारनाथ में कूबड़ ही ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है और सींग जाकर नेपाल में पशुपतिनाथ में निकले सो पशुपतिनाथ नेपाल में पूजे जाते हैं , अब धरम सिंह तोमर फौजी बेचारे परेशान हैं कि इसके सींग कभी इधर निकलते हैं कभी उधर , आखिर सिरा पकड़ें तो कहां पकड़ें ,बेचारे तहसीलदार , एस डी एम , पटवारी और कलेक्टर के सताये हुये हैं , फौज छोड़कर पान सिंह तोमर बनने की राह पर अग्रसर हैं , मीडिया में वे भी जातिविशेष का होने से , छेक दिये गये हैं , भले ही वे पीड़ित हैं मगर उन्हें क्या पता जातिविशेष का मीडिया एक तो जाति के कारण और दूसरा जाति विशेष के अफसरों ओर राजस्व विभाग से मिलने वाले हफ्ते के कारण उनके खिलाफ उनकी आवाज को कभी नहीं छापेगा , टी आई आरती चराटे मीडिया को हफ्ता देती रहती तो क्यों उनकी छीछालेदर और फजीहतें होतीं ।

6.      किस्सा नंबर विधायक सूबेदार सिंह रजौधा का है , जाति विशेष का होने से उन्हें भी मीडिया ने टारगेट पर ले लिया है , सूबेदार सिंह रजौधा किसी गांव में किसी जगह गांव वालों के बीच थे , किसी ने कह दिया कि बिजली वाले लाइन नहीं जोड़ रहे हैं , खेतों में पानी देना है , पैसे दे दिये हैं फिर भी अभी तक लाइन नहीं जोड़ी है , इस पर सूबेदार सिंह ने कह दिया कि तू तब तक अपनी लाइन जोड लें  और मोटर चलाकर अपना काम चला , बिजली वालों को मैं देख लूंगा और बात कर लूगा .... सूबेदार सिंह रजौधा विधायक भी इसी बात पर मीडिया के जातिविशेष के रडार पर आकर टारगेट पर आ गये हैं , हालांकि उनका यह वीडियो हमने भी देखा लेकिन हमें इसमें कुछ विशेष आपत्तिजनक नहीं लगा , एक फौरी समाधान कि अभी काम चला ले .....

 

खैर इसे न तो मीडिया या पत्रकारिता के लिये किसी भी प्रकार से सराहनीय नहीं कहा जा सकता और न ऐसे मीडिया को प्रौतसाहित ही किया जा सकता है जो साहब का पिछवाड़ा धोते धोते अचानक उनका तलवा चाट एक रिक्वेस्ट कर दे कि ऐसा करो और ऐसा न करो , ऐसे जिला प्रशासन और पुलिस को भी तवज्जुह या अहमियत दी जा सकती है जो चाटुकारों और मुंहलगे चमचों के अनुसार यह भूल कर गैर कानूनी काम करे या कानून का पालन न करे क्योंकि वह एक पत्रकार ने रिक्वेस्ट की है ।        

सायबर कानून की लागू होने वाली धारायें , जो आप पर असर डालतीं हैं जानना जरूरी है आपके लिये, पुलिस न लिखे एफ आई आर तो क्या करें

 सायबर कानून की लागू होने वाली धारायें , जो आप पर असर डालतीं हैं जानना जरूरी है आपके लिये, पुलिस न लिखे एफ आई आर तो क्या करें

हमारे कानून- भाग -1

नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ 

धारा 66 A रद्द की जाकर उसका क्रियान्वयन और अनुपालन रोक दिया गया है इसलिये उसका जिक्र यहां नहीं किया जायेगा

पुलिस अगर रिपोर्ट दर्ज न करे तब क्या करें – सुप्रीम कोर्ट द्वारा ललिता कुमारी बनाम बिहार राज्य मे दिये गये आदेश के और दिशा निर्देशों के उपरांत भारतीय दंड संहिता यानि इंडियन पैनल कोड में धारा 166 (क) का इजाफा किया है और रिपोर्ट दर्ज करने से इंकार करने , टालने और रिपोर्ट किसी भी भांति से सूचना मिलने पर भी दर्ज न करने पर उस पुलिस अधिकारी के विरूद्ध आई पी सी की धारा 166 (क) का अपराध पंजीबद्ध किया जाता है , तथा अन्य धारायें जैसे अभियुक्त को सरक्षण देना व बचाना या अपराध में सहभागी होना जैसे अपराध भी साथ में पंजीबद्ध किये जाते हैं , इसके लिये जिला सत्र न्यायालय में आवेदन देकर अपनी पीड़ा दर्ज करायें और जिला न्यायालय उस पुलिस अधिकारी के विरूद्ध धारा 166(क) का अपराध पंजीबद्ध करेगा , इस धारा में प्रकरण दर्ज होने के उपरांत शासकीय कर्मचारीयों और लोकसेवकों के विरूद्ध सी आर पी सी की धारा 195 व 197 के तहत लोकसेवक को संरक्षण प्राप्त नहीं होता है और उसे गिरफ्तार करने का प्रावधान है  

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 में निम्नलिखित संशोधन किये गये और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनयम 2008 कहा जाता है – निम्न प्रावधान जोड़े गये हैं , यह प्रावधान सन 2009 से पूरे देश में लागू हैं -   

66 बी - चोरी का कंप्यूटर और चोरी की डिवाइस प्राप्त करना या / और इस्तेमाल करना - 3 साल का कारावास और 5 लाख का जुर्माना

66- सी - किसी के डिजिटल सिगनेचर का कपट पूर्वक ओश्र बेईमानी पूर्वक बनाना या प्राप्त करना , किसी का पासवर्ड कपटपूर्वक बनाना या प्राप्त करना - 3 साल का कारावास और 5 लाख का जुर्माना

66 डी -किसी के द्वारा किसी डिवाइस से , किसी कंप्यूटर से , मोबाइल सेल फोन से ,किसी अन्य के साथ धोखाधड़ी करना , ठगी करना , या अन्य प्रकार से नुकसान पहुंचाना - 3 साल की कैद और एक लाख रूपये जुर्माना

66 ई -किसी व्यक्ति के प्रायवेट फोटो खीचना , वीडीयों बनाना या/ और उनका प्रसारण या वितरण करना , किसी व्यक्ति की सहमति लिये बगैर , उसकी स्वेच्छा के बगैर जो कोई भी ऐसा करेगा उसे 3 साल का कारावास और 2 लाख रू का जुर्माना

66 ई में - केप्चर का अर्थ , किसी के फोटो , वीडियो , विजुअल्स आदि शामिल हैं , जिसमें आडियो तथा , फिल्म तथा अन्य किसी भी भांति से रिकार्डिंग करना शामिल है

प्रसारण या वितरण का अर्थ किसी भी भांति से दूसरे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों तक पहुचानाया देना या आदान प्रदान करना है

प्रायवेट एरिया का अर्थ - नग्न , अंडर गार्मेंट में , लंगोट या चड्डी में , बनियान या ब्रेसियरी में , किसी के कूल्हे या बटक , स्त्री के स्तन या छाती दिखाना या उसका फोटो , वीडियो या अन्य प्रकार से किसी भी प्रकार से आडियो या विजुअल रिकार्ड करना

प्रायवेसी वायोलेशन या निजता भंग का अर्थ - कोई भी व्यक्ति कहीं पर भी हो चाहे प्रायवेट प्लेस में जहां वह निंश्चिंत होकर अपने कपड़े बदलता या स्नानादि या शौचादि करता है या वह किसी भी पब्लिक प्लेस पर है , उसके किसी भी प्रायवेट पार्ट या उसके अपमान करने वाले , या उसकी छवि खराब करने वाले और किसी प्रायवेट कार्य का चित्रण या रिकार्डिंग आदि करना या अगर स्त्री है तो उसकी लज्जा भंग करना या उसे कामुक रूप में प्रदर्शित करना आदि

66 एफ -किसी अधिकृत व्यक्ति को उसके कंप्यूटर या डिवाइस या मोबाइल की एक्सेस से रोकना या बाधा डालना या बाधित कर वंचित करना तथा अनाधिकृत होकर भी किसी कंप्यूटर या डिवाइस या मोबाइल में जबरन एक्सेस करना , एक्सेस की कोशिश करना , पेनेट्रेट करना , किसी व्यक्ति को या उसके सिस्टम को क्षति पहुंचाना , कंप्यूटर या डिवाइस या मोबाइल या सिस्टम को नुकसान या क्षति पहुंचाना , किसी को आत्महत्या करे के लिये बाध्य करना , प्रेरित करना , या किसी की इन कारणों से मृत्यु होना , उसके जीवन के लिये आवश्यक वस्तुओं , आवश्यक चीजों की सप्लाई रोकना या सप्लाई बाधित करना या गतिरोध डालना या अन्य प्रकार से भयभीत या आतंकित करना , उसके डाटा को चुराना किसी भी प्रकार से उसके डाटाबेस को नुकसान या क्षति पहुंचाना यह सभी कार्य सायबर टेरेरिज्म , सायबर आतंकवाद होंगें - आजीवन कारवास ( जीवन रहने तक मृत्यु तक )

67 - ए - नंगी फिल्में ,ब्ल्यू फिल्म या कामोत्तेजक दृश्य या फिल्म या अन्य प्रकार से सेक्सुली इन्वोल्व्ड या सेक्स दृश्य या अर्धनग्न दृश्य को प्रकाशित या प्रसारित करेगा या ट्रांसमिट करेगा वह कम से कम पहली बार दोषी पाये जाने पर 5 साल के कारावास और दस लाख रूपये के जुर्माने से दंडित होगा और यदि वह दूसरी बारऐसा करता हुआ दोषी पाया गया तो 7 साल के कारावास और दोबारा दस लाख रूपये के जुर्माने से दंडित होगा ।

67 - बी - बच्चों के सेक्सुअल उत्प्रेरण आमंत्रण व शोषण से संबंधित है ( बच्चों का नग्न व अश्लील प्रदर्शन, फोटो , वीडियो , आडियो आदि का अश्लील प्रसारण व प्रकाशन, उनकी पहचान खोलना , बच्चों को सेक्स के लिये उकसाना , बहलाना , फुसलाना , आमंत्रित करना , उन्हें लोभ लालच या भय दिखाकर उनकी पोर्नोग्राफी करना , इंटरनेट या अन्य किसी माध्यम से उनका प्रकाशन या प्रसारण करना , अन्य किसी भी चित्र या आडियो विजुअल माध्यम से बच्चों में ऐसी प्रवृत्ति या आदत डालने का प्रयास करना , या उन्हें किसी भी भांति से सेक्स या सेक्स एक्टिविटी दिखाना , देखने हेतु बाध्य करना , या प्रोत्साहित करना आदि जैसे अपराध इसमें शामिल हैं ( इसका विशद विस्तार हम यहां नहीं दे रहे हैं , लेकिन अगर आपके आसपास यह कहीं भी हो रहा है तो या तो नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टंग ब्यूरो , गृहमंत्रालय भारत सरकार को ऑनलाइन रिपोर्ट करें या उनके ट्विटर पर आफिशियल हैंडल ‘’ सायबर दोस्त’’ को रिपोर्ट करें या अपने राज्य की पुलिस के सायबर सेल को आनलाइन रिपोर्ट करें , यह रिपोर्ट आप अपनी पहचान छिपा कर भी कर सकते हैं और एनोनीयमस यानि अज्ञात व्यक्ति के रूप में भी रिपोर्ट कर सकते हैं ।   

 

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000

धारायें  -

4 - लीगल मान्यता या वैधानिक मान्यता किसी इलेक्ट्रानिक अभिलेख की

1. वह अभिलेख आनलाइन उपलब्ध होता है / हुआ है या हो रहा है

2.वह दस्तावेज या अभिलेख फ्रिक्वेण्टली एक्सेस होता है / किया गया है

66 - हैकिंग - 3 साल कारावास और 2 लाख रूपये जुर्माना

71 -डिजिटल सिगनेचर का इस्तेमाल किसी गलत या गैर कानूनी या गुमराह करने के लिये या किसी असत्य व मिथ्या तथ्य वाले दस्तावेज पर किया गया तो तीन साल कारावास और दो लाख रूपये का जुर्माना होगा

74 - धोखाधड़ी / जालसाजी के लिये डिजिटल सिगनेचर का इस्तेमाल करना - 2 साल की कैद और एक लाख रू का जुर्माना      

 

 

शुक्रवार, 18 जून 2021

अंबाह तहसीलदार का फर्जी नामांतरण मामला अब पुलिस मुख्यालय में, मुरैना ए एस पी से हटा मामला, थाना पुलिस मुख्यालय में दर्ज हुआ मामला, सी एम हेल्पलाइन ने भी नामांतरण के गायब किते तीनों आवेदनों को पुलिस शिकायत में मर्ज किया

 मुरैना में अंबाह तहसीलदार तथा पटवारी और अन्य के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरण, एडिशनल एसपी मुरैना से हटाया गया, अब मामला पुलिस मुख्यालय थाने में दर्ज हुआ , उधर सी एम हेल्पलाइन ने भी तीनों नामांतरण आवेदन पर कार्यवाही नहीं करने की सभी शिकायतों को पुलिस कंप्लेंट में मर्ज किया और राजस्व विभाग से मामला पुलिस कंप्लेंट में तब्दील किया 

मुरैना 18 जून 2021 , मुरैना की अम्बाह तहसील के बरेह पंचायत में ग्राम बारेकापुरा स्थित कृषि एवं रिहायशी जमीन का मामला 13 अप्रैल 21 को एडमिशन एस पी मुरैना के यहां दर्ज किया गया था, अब इस मामले को एडिशनल एसपी मुरैना से हटा कर थाना पुलिस मुख्यालय भोपाल में सीधे पुलिस महानिदेशक के यहां दर्ज किया गया है । अब इस पर कार्यवाही पुलिस महानिदेशक, और थाना पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा की जा रही है ।

उधर दूसरी ओर म प्र की सी एम हेल्पलाइन ने भी आवेदक की सभी तीनों नामांतरण आवेदनों को भी सी एम हेल्पलाइन पर दर्ज इस संबंध में पुलिस शिकायत में मर्ज कर दिया है और सभी मामले  पुलिस को सौंप दिये हैं , तथा यह भी कि केवल एक शिकायत का आरोपीगण चालाकी से उतर दे रहे थे और दिनांक 09 मार्च 21 के एक आवेदन पर नामांतरण किया जाना दर्शाने में और साबित करने में जुटे थे, जबकि जांच में खुद आरोपियों द्वारा कूटरचित आवेदन और जाली दस्तावेजों की फाइल 2504/अ-6/2020-2021 में ही दिनांक 26 मार्च 21 को ही यह आवेदन स्वयं आरोपीगण द्वारा जमा किया जाना पाया गया । और इसी पर केवल दो तारीखों 26 मार्च 21 और 31 मार्च 21 को अंतिम आदेश किया जाना पाया गया । 

बहरहाल पुलिस मामले में अभियुक्त नामजद कर दिये गये है , अब इस मामले में यह जांच की जा रही है कि नामजद अभियुक्तों के अलावा और कौन कौन लोग इस फर्जीवाड़े और जालसाजी में शामिल हैं ।

बुधवार, 19 मई 2021

दिमाग तो दिमाग तेरा दिल भी जो न थरथराये तो कहना , अपने जुल्मो सितम पर खुश् होने वाले , तेरे खुदा भी कांप न जायें तो कहना

 पत्ते पत्ते पर लिखा है उस प्रभु का नाम , हर बॉडी और हर डेड बॉडी पर लिखा है कोरोना के खाने का नाम , तेरे हर अंग पर भी लिखा है मरों को लूटने वाले तेरे हर काम का अंजाम, बस इंतजार कर मुनासिब वक्त आने का , तेरे हर काम का हिसाब रखा जायेगा , जरा वक्त तो आने दे , मासूमों के लहू के हर कतरे का बड़ा बेहिसाब तेरा हिसाब किया जायेगा  

-        नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’

पिछले अंक से आगे ………

दूसरा - भाग

यद्यपि हमने सोचा था कि इस समसामायिकी आलेख को दो किश्तों में समाप्त कर देंगें लेकिन विषय बृहद और विषय सामग्री विस्तार से यह संभव नहीं लगता लिहाजा जहां तक विषय चले वहॉं तक इसकी विषय सामग्री चलेगी , इसलिये यह अब दो से अधिक भागों में आयेगा और केवल आखरी भाग पर ही अंतिम किश्त लिखेंगें – नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ एडवाकेट

अभी पिछले अंक में कोरोना पॉजिटिव या संक्रमण के जांच के तरीकों पर इस आलेख में चर्चा कर रहे थे ।

उपकरणीय अन्य जांचें और प्रयोगशाला जांचें – हमें इस विषय को आगे ले जाने से पहले एक तथ्य विशेष रूप से स्मरण रखना होगा कि कोई भी बेहतरीन मेडिकल उपकरण या बेहतरीन प्रयोगशाला तीन विशेष लोगों से ही बन सकती है – एक बेहतरीन चिकित्सकीय ज्ञान रखे वाला डॉक्टर , दूसरा एक बेहतरीन इंजीनियर और तीसरा एक बेहतरीन साइंस यानि विज्ञान का विद्वान ।

विज्ञान के विद्वान में भी दो स्ट्रीमों का सम्मिश्रण या दो अलग अलग लोग जिसमें एक गणित स्ट्रीम  का और दूसरा बायोलॉजी यानि जीव विज्ञान स्ट्रीम का स्पेशलिस्ट होना चाहिये तब जाकर एक बेहतरीन मेडिकल उपकरण या लैब तेयार हो पाती है । उसे बाद में पैरामेडिकल विशेषज्ञ या विज्ञान स्ट्रीम के लोग ऑपरेट या संचालित करते हैं , लेकिन निर्माण की बुनियाद से लेकर प्रोटोटाइप बनाने और उसे विकसित कर असल मशीन या उपकरण बनाने या लैब तैयार करने में तो उपरोक्त तीन ही काम कर पायेंगें , वर्तमान में इन तीनों का एकसाथ बखूबी संयोजन व उपयोग भारत में किसी भी मेडिकल मशीन बनाने में या उपकरण या लैब तैयार करने में नहीं किया जाता है और केवल दो लोग ही इनमें से चुने जाते हैं जिससे मशीनें व उपकरण उस दक्षता व क्षमता के तथा एक्यूरेसी के भारत में नहीं बनते और न मेडिकल लैब ही उस दक्षता व क्षमता की होती है जो कि भारत बना सकता है मगर अयोग्य व अनुभवहीन जनप्रतिनिधियों और राजनेताओं की सत्ता लोलुपता और भ्रष्टाचार प्रियता के कारण ऐसा भारत में नहीं होता या हो पाता । इसकी बहुत सी वजह और कारण हैं मगर वे इस आलेख का विषय नहीं हैं ।

अगला परीक्षण या जांच स्वैब का परीक्षण , रक्त परीक्षण , मल मूत्र परीक्षण , प्यूबिक हेयर परीक्षण , अंदरूनी चोट आदि परीक्षण , बाहरी चोट आदि परीक्षण , आमाशय या आहार संबंधी परीक्षण , अन्य हड्डी संबंधी, सीमन टेस्ट तथा अन्येन्य प्रकारेण परीक्षण आदि । ये सभी परीक्षण इस आलेख का विषय नहीं हैं इनका हम केवल इस संदर्भ में प्रयोग करेंगें कि क्या परीक्षण वर्तमान में किये जा रहे हैं और क्या क्या जरूरी परीक्षण छोड़े जा रहे हैं ।

वर्तमान में कोरोना पॉजिटिव टेस्ट करने के लिये स्केनिंग के बाद स्वैब टेस्टिंग करने का रिवाज अपनाया जा रहा है जिसमें उल्टी , कफ , थूक और लार आदि के जरिये होने वाला स्त्राव या प्राप्त कर इनकी जॉंच करने को स्वैब टेस्टिंग कहा जा रहा है । और इसका परिणाम में कोरोना वायरस की मौजूदगी का अनुमान लगया जाता है या पुष्टि कर दी जाती है ।

इससे आगे कुछ  नहीं ,जो यह पुष्ट करे कि क्या वाकई किसी को कोरोना है या नहीं ।

किसी  कोरोना रोगी के रक्त की पहले क्या स्थिति थी , अब क्या है और उसके डिस्चार्ज के समय या श्मशान भेजते समय क्या स्थिति थी ,इस जांच की कोई व्यवस्था अभी तक भारत में नहीं है । इसलिये मौत की वजह या ठीक हो जाने के बाद इलाज पश्चात उसके प्रतिक्रियात्मक लक्षणों और पश्चातवर्ती रक्त लक्षणों के बारे में कोई भी जांच रिपोर्ट उसकी मेडिकल हिस्ट्री में नहीं होती लिहाजा न तो इसके बगैर किसी भी शख्स  में न तो कोरोना की पुष्टि की जा सकती है और न इससे इंकार कर नकारा जा सकता है ।

स्वैब टेस्टिंग मात्र खांसी बलगम आदि की जांच करने मात्र का एक सरल सा उपाय और जांच है , जिसके भी स्वैब में खांसी , फ्लू ( बुखार ) , कफ और छींक के साथ निकलने वाले छोटे मोटे जीव जंतु होंगे उस हर आदमी को यह टेस्ट खांसी जुकाम कफ से पीड़ित ही बतायेगा और बलगम भी मौजूद है तो गंभीर पॉजिटिव ही बतायेगा । इससे अधिक यह टेस्ट कुछ और नहीं बताता , कोरोना वायरस का डिटेल या सैंपल अभी तक न तो भारत के पास है और न विश्व के किसी अन्य देश के पास जिससे मिलान करके किसी को कोरोना होना साबित किया जा सके ।

जबकि इससे पूर्व पक्षियों के बर्ड फ्ल्यू , एड्स के वायरस ( एच आई वी ) तथा अन्य वायरस जन्य बीमारीयों के नमूने भारत सहित विश्व के अन्य देशों के पास हैं और उनसे मिलान के पश्चात ही किसी में इनकी पुष्टि कर दी जाती है ।  मगर कोरोना के बारे में जो रहस्य है वह यह है कि होती सबको केवल खांसी बुखार दर्द सर्दी और जुकाम ही है मगर कहा यह जाता है कि हर 15 – 20 दिन में यह वायरस अपना रूप बदलता है मतलब बीमारी के लक्षण बदल देता है या बीमारी ही बदल देता है । आश्चर्य यह है कि रोगी की न तो कभी बीमारी बदलती है और न कभी उसका जांच का तरीका या सिस्टम बदलता है , ऐसा ठोस पुख्ता और अद्वितीय जांच सिस्टम है कि रूप बदल रहे कोरोना वायरस के हर रूप को एक ही तरीके से पकड़ता रहता है , जबकि तार्किक तरीका यह है कि जब जब वायरस रूप बदले तो उसके हर बहुरूपिये रूप की एक तस्वीर खीच कर विश्व के सभी देशों के हर अस्पताल को भेजनी चाहिये और उसके उस रूप को पकड़ने और पहचानने का तरीका और बदले जाने वाले टेस्टिंग मैथड को भी साथ भेजा जाना चाहिये जिससे टेस्ट का तरीका और मिलान करके अच्छी जांच रिपोर्ट के साथ मरीज के नाम के आगे लिखा जाये कि उसे कोरोना के कौनसे रूप के किस वर्जन ने कब किस दिन जकड़ा , कब से वह उसके अंदर घुसा और कितना भीतर तक घुस चुका है और क्या इसके बावजूद उस कोरोना वायरस का अन्य कोई रूप या वर्जन भी उसके अंदर आ सकता और घुस सकता है या नहीं । और यह रूप टाइप क्या गड़बड़ीयां और खलबलियां उस मरीज के शरीर में मचायेगा और उसे क्या क्या ऐहतियातें और परहेज बरतने होंगें , वह बिना खाये पीये जिंदा रहे या खा पीकर मरे , ये सब जिक्र तभी संभव होंगें जब हर बदलते रूप का हर डिटेल हर अस्पताल , हर डाक्टर , हर नर्स और हर मरीज और उसके घरवालों को पता हो ।

................ शेष अगले अंक में जारी ..............             

– नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’ आनंद’’ एडवोकेट

( कोराना में वीरगति पाकर शहीद हुये  लोगों के लिये,  उन शहीदों की ओर से भारत के सिस्टम के नाम )

हम राह की कुचली हुई धूल ही सही मगर कीचड़ बनाओगे तो हममें ही फंस जाओगे , जर्रा ही सही और हम लटके हुये झाड़ फानूस ही सही ,हमारी जांच बीमारी इलाज और मौत डैड बॉडी दौलत में तौलने वालो  तुम अमर आफताब ही बने रहो , जो जमीं पे आओगे तो हमारे आसपास ही कुचले जाओगे । हमारी दौलतें बिंकी , घर जेवर मकान दूकान तलक बिके , बीवी मिटी तो कहीं बच्चे भी मिटे , मिट गईं खुशियां, शानो शौकत और रिश्तेदारीयां , तुमने मजबूरियों का जाल कुछ इस कदर बुन दिया कि न मौक्ष न बेटे का कंधा न नाती का श्मशान तक साथ नसीब हुआ , न चिता पर भी मेरी कैद खोली पॉलीथीन के कफन से , जिंदा तो जिंदा मुझ मुर्दे को भी लूट लिया , मेरी अंगूठी गायब , मेरी झुमकियां गायब , पायलें भी गायब तो मरी तो कही आबरू भी गायब हुई अस्पतालों में । जीते जी न मिलने दिया तुमने अपनों से और अकेले मार कर तुमने कुछ ऐसा हाल कर दिया मेरा कि देखूं कैसे कि ऑखें भी गायब कर दी तुमने , बोलू कैसे दांत भी गायब तो अब जबड़ा भी गायब हो गया मेरा , अब कुछ खा पी कर पेशाब कर आता पूरी जिंदगी की तरह , मगर क्या करूं ऐ लूट और जुल्म के सितमगारो लीवर भी मेरा गायब , किडनी भी मेरी गायब है , वह जो लेटी है मेरे पड़ोस की अर्थी पर उसका मंगलसूत्र गायब क्या किया कि उसका सुहाग भी गायब हो गया , अब जितने भी हैं यहां सब पॉलीथीनों में पैक पड़े हैं , उनके दिमागो दिल में अपने घर के बसे हैं , इंतजार में बस उनके हाथ जल पाने की , जल की दो बूंदों को अटके पड़े हैं , काश  कोई तो आयेगा जो आजाद इन पॉलीथिनों से करेगा , मंदिरों की घंटियां कुछ मंत्र भी सुनायेगा , मस्जिदों की अजान सुनने को यहॉं सैकड़ों इंतजार कर रहे , और हम सब उसकी राह देख रहे , कोई होगा जो आयेगा , अपने पिता को बहन को कैद में डालने वाले कंस से कोई कृष्ण आकर हमें छुड़ायेगा , बस टकटकी है जिनकी आंखें बच गईं बाकी को वही हाल ए नजर सुनाते हैं , बिना आंख वालों को नजर वाले और बिना किडनी लीवर वालों को यहॉं कुछ मरे डॉक्टर रोजाना कुछ ऑक्सीजन और सांसें चुरा कर देते हैं , और फिर हम सब मिलकर राह तकते हैं , मेरे भारत मेरे कृष्ण हम तेरी राह तकते हैं ।

                                        - नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’       

 

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